राजनीतिक दुष्चक्र में वैदिक संस्कृति, पर कैसे ? 

मित्रों, हमने सुना है, कि नेपाल की ९०% अर्थव्यवस्था सिर्फ एक पशुपतिनाथ मन्दिर से चलती है । कितना सच है

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लाभ से लोभ और लोभ से पाप बढ़ता है-लाभेन वर्धते लोभः ।।

जय श्रीमन्नारायण, लाभ से लोभ और लोभ से पाप बढ़ता है । पाप के बढ़ने से धरती रसातल मे चली

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मनुष्य के वासना की उम्र ।।

एक दिन सम्राट अकबर ने दरबार में अपने मंत्रियों से पूछा कि मनुष्य में काम-वासना कब तक रहती है। कुछ

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देवकी के मृतवत्सा होने का कारण ।।

अवश्यमेव भुक्तब्यं कृतं कर्म शुभाशुभं ।। 1.एक बार महर्षि कश्यप यज्ञ कार्य हेतु वरुणदेव की गाय ले आये । यज्ञ

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राधाजी के नाम की महिमा ।।

जय श्रीमन्नारायण, मित्रों, परम प्रिया श्री राधाजी के नाम की महिमा का गान करते हुए स्वयं हमारे प्रियतम श्री कृष्ण

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भक्ति की पराकाष्ठा ।।

जय श्रीमन्नारायण, वाणी गुणानुकथने श्रवणौ कथायां, हस्तौ च कर्मसु मनस्तव पादयोर्न: ।। स्मृत्यां शिरस्तव निवासजगत्प्रणामे, दृष्टि: सतां दर्शनेअस्तु भवत्तनुनाम्।। (श्रीमद्भागवतम

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अथ श्री मधुराष्टकं रचना : श्री वल्लभाचार्य।।

अधरं मधुरं वदनं मधुरंनयनं मधुरं हसितं मधुरम् । हृदयं मधुरं गमनं मधुरंमधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ १ ॥ वचनं मधुरं चरितं मधुरंवसनं

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जीवन एक यज्ञ है ।।

जय श्रीमन्नारायण, परमात्मा के मिलन रूपी यज्ञ मे श्रद्धा पत्नी है, आत्मा यजमान है, शरीर यज्ञ वेदी है, और फल

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धर्म तथा धार्मिक मनुष्य के दस लक्षण !!

नमों नारायणाय, मनुस्मृति में धर्म के दस लक्षणों का वर्णन है, जिन्हे आचरण में उतारने वाला व्यक्ति ही धार्मिक कहलाने

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सनातन धर्मं में संस्कार की आवश्यकता।।

नमों नारायणाय, वैदिक सनातन धर्म की संस्कृति संस्कारों पर ही आधारित है । हमारे ऋषि-मुनियों ने मानव जीवन को पवित्र

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