श्री त्रिदंडी देव सेवाश्रम संस्थान, सिलवासा की ओर से सभी मित्रों, शुभचिन्तकों एवं सभी वैष्णवों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें । आप सभी पर माँ लक्ष्मी एवं भगवान नारायण की कृपा सदैव बनी रहे ।। नारायण नारायण ।।

Mission

जय श्रीमन्नारायण,

मित्रों, एक बात पर गौर करें आप, मैं बराबर कहता हूँ, की एक ही बात को केवल रटने से हमारा समाज कही न कही टूटता हुआ नजर आता है क्या ऐसा हमारे यहाँ कोई हुआ जिसने कभी कोई नई बात सोंची या बताई हो ? अथवा बताने का कभी प्रयास भी किया हो ।।

मैं बताता हूँ, (जो मैंने गुरुओं के गुरु, श्रीमद्विष्वक्सेनाचार्य, परम आदरणीय, ब्रह्मलीन वैकुंठवासी, श्री त्रिदंडी स्वामी जी महाराज सुना है) हमारे वेद, हमारे शास्त्र और हमारे धर्म के सभी सिद्धांत नए-नए खोज से परिपूर्ण (with Research) हैं एक उदहारण से बताता हूँ, जैसा की हमें पढाया जाता है, की न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत की खोज की क्योंकि हमने अपने शास्त्रों को महत्त्व नहीं दिया, हमने या हमारे किसी आचार्यों ने कभी इस विषय में अपने शास्त्रों का अवलोकन नहीं किया ।।

भास्कराचार्य सिद्धान्त की बात कहते हैं कि वस्तुओं की शक्ति बड़ी विचित्र है ।।
आकृष्टिशक्तिश्च मही तया यत् खस्थं - गुरुस्वाभिमुखं स्वशक्तत्या ।।
आकृष्यते तत्पततीव भाति - समेसमन्तात् क्व पतत्वियं खे
।।
 
- सिद्धांतशिरोमणि गोलाध्याय - भुवनकोश

अर्थात् पृथ्वी में आकर्षण शक्ति है
पृथ्वी अपनी आकर्षण शक्ति से भारी पदार्थों को अपनी ओर खींचती है, और आकर्षण के कारण वह जमीन पर गिरते हैं पर जब आकाश में समान ताकत चारों ओर से लगे, तो कोई कैसे गिरे ? अर्थात् आकाश में ग्रह निरावलम्ब रहते हैं, क्योंकि विविध ग्रहों की गुरुत्व शक्तियाँ संतुलन बनाए रखती हैं ।।

सर्वप्रथम हमारे यहाँ पानी के जहाज होते थे, पुष्पक विमान हमारे यहाँ था टेलीविजन वेदव्यास जी ने धृतराष्ट्र को महाभारत की कथा सुनाने हेतु संजय को दिया था लेकिन हमारे बिच के आचार्यों ने इनकी कथाएं तो खूब सुनाई, लेकिन कभी इस विषय में न खुद सोंचा न समाज को सोंचने दिया ।।

ऐसे ही अगर यह कहा जाय की विज्ञान के सारे आधारभूत अविष्कार भारत भूमि पर हमारे विशेषज्ञ ऋषि मुनियों द्वारा हुए, तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी सबके प्रमाण उपलब्ध हैं, आवश्यकता स्वभाषा में विज्ञान की शिक्षा दिए जाने की है ।।

मैंने सोंचा है, की समाज को भागवत कथा एवं राम कथा के माध्यम से एक नई सोंच की ओर ले जाऊँगा ताकि हमारे यहाँ भी वैज्ञानिक पैदा हों, और अपने शास्त्रों में, हमारे पूर्वज ऋषियों द्वारा प्रदत्त गूढ़ ज्ञान से कुछ नया खोज करें, और दुनियां को बताएं, की हम किसी से कभी भी कम नहीं थे, और आज भी कम नहीं हैं ।।

इस मिशन को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने हेतु आपका सहयोग अपेक्षित है ! आपके कल्याण का आकांक्षी स्वामी धनञ्जय महाराज ।।

।। नमों नारायण ।।

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