My Mission

मेरा लक्ष्य ।। My Mission.

 

जय श्रीमन्नारायण,

मित्रों, आप सभी मेरी इस एक बात पर ध्यान दें, मैं बराबर कहता हूँ, की एक ही बात को केवल रटने से हमारा समाज कही न कही टूटता हुआ नजर आता है । क्या ऐसा हमारे यहाँ कोई हुआ जिसने कभी कोई नई बात सोंची या बताई हो ? अथवा बताने का कभी प्रयास भी किया हो ।।

मैं बताता हूँ, हमारे वेद, हमारे शास्त्र और हमारे धर्म के सभी सिद्धांत नए-नए खोज से परिपूर्ण (with Researchable) हैं । एक उदहारण से बताता हूँ, जैसा की हमें पढाया जाता है, की न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत की खोज की, जबकि यह बात पूर्णतया असत्य है ।।

क्यों सत्य नहीं है ? क्योंकि हमने अपने शास्त्रों को महत्त्व नहीं दिया, हमने या हमारे किसी आचार्यों ने कभी इस विषय में अपने शास्त्रों का अवलोकन नहीं किया ।।

आइये देखें की हजारों वर्ष पहले ही इस सिद्धांत के प्रतिपादक भास्कराचार्य क्या कहते हैं, कहते हैं कि वस्तुओं की शक्ति बड़ी विचित्र होती है ।।

आकृष्टिशक्तिश्च मही तया यत् खस्थं गुरुस्वाभिमुखं स्वशक्तत्या ।।
आकृष्यते तत्पततीव भाति – समेसमन्तात् क्व पतत्वियं खे ।।
– सिद्धांतशिरोमणि गोलाध्याय – भुवनकोश.

अर्थात् पृथ्वी में आकर्षण शक्ति है । पृथ्वी अपनी आकर्षण शक्ति से भारी पदार्थों को अपनी ओर खींचती है और आकर्षण के कारण वह पृथ्वी पर गिरते हैं । पर जब आकाश में समान ताकत चारों ओर से लगे हों तो कोई कैसे गिरे ? अर्थात् आकाश में ग्रह निरावलम्ब रहते हैं, क्योंकि विविध ग्रहों की गुरुत्व शक्तियाँ संतुलन बनाए रखती हैं ।।

मित्रों, सर्वप्रथम हमारे यहाँ पानी के जहाज होते थे, पुष्पक विमान हमारे यहाँ था । दूरदर्शन की सर्वोत्कृष्ट गुणवत्ता महाभारत की कथा धृतराष्ट्र को सुनाने हेतु उस काल में वेदव्यास जी के द्वारा संजय को दी गयी विद्या है । परन्तु हमारे कुछ अल्पज्ञानी आचार्यों ने इनकी कथाएं तो खूब सुनाई, लेकिन कभी इस विषय में न खुद सोंचा न समाज को सोंचने दिया ।।

ऐसे ही अगर यह कहा जाय की विज्ञान के सारे आधारभूत अविष्कार भारत भूमि पर हमारे विशेषज्ञ ऋषि मुनियों द्वारा हुए, तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी । सबके प्रमाण उपलब्ध हैं, आवश्यकता स्वभाषा में विज्ञान की शिक्षा दिए जाने की है ।।

मेरा ये विचार है, कि समाज को भागवत कथा एवं राम कथा के माध्यम से ही एक नई सोंच की ओर ले जाऊँगा । ताकि हमारे यहाँ भी वैज्ञानिक विचारधारा का अविर्भाव हों, और अपने शास्त्रों में हमारे पूर्वज ऋषियों द्वारा प्रदत्त गूढ़ ज्ञान से कुछ नया खोज करें और दुनियां को बताएं कि हम किसी से कभी भी कम नहीं थे और आज भी कम नहीं हैं ।।

इस लक्ष्य (Mission) को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने हेतु आपका सहयोग अपेक्षित है । आपके कल्याण का आकांक्षी स्वामी धनञ्जय महाराज ।।

।। नमों नारायण ।।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *