अथ श्रीऋद्धि स्तवः ।। Shri Riddhi Stavah.

अथ श्रीऋद्धि स्तवः ।। Shri Riddhi Stavah. श्रीमन्वृषभशैलेश वर्धतां विजयी भवान् । दिव्यं त्वदीयमैश्वर्यं निर्मर्यादं विजृम्भताम् ॥ १॥ देवीभूषायुधैर्नित्यैर्मुक्तैर्मोक्षैकलक्षणैः ।

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अथ श्रीउज्ज्वल वेङ्कटनाथ स्तोत्रम् ॥ Shri Ujjvala Venkatanatha stotram.

अथ श्रीउज्ज्वल वेङ्कटनाथ स्तोत्रम् ॥   रङ्गे तुङ्गे कवेराचलजकनकनद्यन्तरङ्गे भुजङ्गे शेषे शेषे विचिन्वन् जगदवननयं भात्यशेषेऽपि दोषे । निद्रामुद्रां दधानो निखिलजनगुणध्यानसान्द्रामतन्द्रां

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तेरे चेहरे को कभी भुला नहीं सकता ।।

जय श्रीमन्नारायण, प्यारे कन्हैया,   तेरे चेहरे को कभी भुला नहीं सकता । तेरी यादों को भी दबा नहीं सकता

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मैं दिल हूँ तुम मेरी साँसे हो ।।

जय श्रीमन्नारायण, प्यारे कन्हैया, मैं दिल हूँ तुम मेरी साँसे हो ।। मैं जिस्म हूँ तुम मेरी जान हो ।।

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अथ श्रीदेवीकृत स्वामी वेङ्कटेश प्रातःस्तुती ।।

अथ श्रीदेवीकृत स्वामी वेङ्कटेश प्रातःस्तुती ।। Devi Krita Shri Venkatesha Pratah Stuti. सा द्वारदेशे श्रीनिवासस्य देवी स्वामिपुष्करिणीं ददृशे कैश्च सार्धम् ।

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अथ अच्युताष्टकम् ।। Achyutashtakam.

अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम् । श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकीनायकं रामचन्द्रं भजे ॥१॥ अच्युतं केशवं सत्यभामाधवं माधवं श्रीधरं राधिकाराधितम्

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लाभ से लोभ और लोभ से पाप बढ़ता है-लाभेन वर्धते लोभः ।।

जय श्रीमन्नारायण, लाभ से लोभ और लोभ से पाप बढ़ता है । पाप के बढ़ने से धरती रसातल मे चली

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मनुष्य के वासना की उम्र ।।

एक दिन सम्राट अकबर ने दरबार में अपने मंत्रियों से पूछा कि मनुष्य में काम-वासना कब तक रहती है। कुछ

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देवकी के मृतवत्सा होने का कारण ।।

अवश्यमेव भुक्तब्यं कृतं कर्म शुभाशुभं ।। 1.एक बार महर्षि कश्यप यज्ञ कार्य हेतु वरुणदेव की गाय ले आये । यज्ञ

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भज गोविंदम, भज गोविंदम, भज गोविंदम मूढ़मते ।।

भज गोविंदम, भज गोविंदम, भज गोविंदम मूढ़मते ।। भज गोविंदम,भज गोविंदम,भज गोविंदम मूढ़मते ।। संप्रप्ते सन्निहिते काले,नहि नहि सक्षति डुकृञ्करणे

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