भक्ति की पराकाष्ठा ।।

जय श्रीमन्नारायण, वाणी गुणानुकथने श्रवणौ कथायां, हस्तौ च कर्मसु मनस्तव पादयोर्न: ।। स्मृत्यां शिरस्तव निवासजगत्प्रणामे, दृष्टि: सतां दर्शनेअस्तु भवत्तनुनाम्।। (श्रीमद्भागवतम

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