श्री कृष्णाष्टकम् ।। Sansthanam.

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अथ श्री कृष्णाष्टकम् ४।।
 
श्रियाश्लिष्टो विष्णुः स्थिरचरगुरुर्वेदविषयो
     धियां साक्षी शुद्धो हरिरसुरहन्ताब्जनयनः |
गदी शङ्खी चक्री विमलवनमाली स्थिररुचिः
     शरण्यो लोकेशो मम भवतु कृष्णोऽक्षिविषयः ||१||
यतः सर्वं जातं वियदनिलमुख्यं जगदिदम्
     स्थितौ निःशेषं योऽवति निजसुखांशेन मधुहा |
लये सर्वं स्वस्मिन्हरति कलया यस्तु स विभुः
     शरण्यो लोकेशो मम भवतु कृष्णोऽक्षिविषयः ||२||
असूनायम्यादौ यमनियममुख्यैः सुकरणै/-
     र्र्निरुद्ध्येदं चित्तं हृदि विलयमानीय सकलम् |
यमीड्यं पश्यन्ति प्रवरमतयो मायिनमसौ
     शरण्यो लोकेशो मम भवतु कृष्णोऽक्षिविषयः ||३||
पृथिव्यां तिष्ठन्यो यमयति महीं वेद न धरा
     यमित्यादौ वेदो वदति जगतामीशममलम् |
नियन्तारं ध्येयं मुनिसुरनृणां मोक्षदमसौ
     शरण्यो लोकेशो मम भवतु कृष्णोऽक्षिविषयः ||४||
महेन्द्रादिर्देवो जयति दितिजान्यस्य बलतो
     न कस्य स्वातन्त्र्यं क्वचिदपि कृतौ यत्कृतिमुते |
बलारातेर्गर्वं परिहरति योऽसौ विजयिनः
     शरण्यो लोकेशो मम भवतु कृष्णोऽक्षिविषयः ||५||
विना यस्य ध्यानं व्रजति पशुतां सूकरमुखाम्
     विना यस्य ज्ञानं जनिमृतिभयं याति जनता |
विना यस्य स्मृत्या कृमिशतजनिं याति स विभुः
     शरण्यो लोकेशो मम भवतु कृष्णोऽक्षिविषयः ||६||
नरातङ्कोट्टङ्कः शरणशरणो भ्रान्तिहरणो
     घनश्यामो वामो व्रजशिशुवयस्योऽर्जुनसखः |
स्वयंभूर्भूतानां जनक उचिताचारसुखदः
     शरण्यो लोकेशो मम भवतु कृष्णोऽक्षिविषयः ||७||
यदा धर्मग्लानिर्भवति जगतां क्षोभकरणी
     तदा लोकस्वामी प्रकटितवपुः सेतुधृदजः |
सतां धाता स्वच्छो निगमगणगीतो व्रजपतिः
     शरण्यो लोकेशो मम भवतु कृष्णोऽक्षिविषयः ||८||
इति हरिरखिलात्माराधितः शंकरेण
श्रुतिविशदगुणोऽसौ मातृत्मोक्षार्थमाद्यः |
यतिवरनिकटे श्रीयुक्त आविर्बभूव
स्वगुणवृत उदारः शण्खचक्राञ्जहस्तः ||९||

इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ कृष्णाष्टकं संपूर्णम् ।।

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भागवत प्रवक्ता- स्वामी धनञ्जय जी महाराज "श्रीवैष्णव" परम्परा को परम्परागत और निःस्वार्थ भाव से निरन्तर विस्तारित करने में लगे हैं। श्रीवेंकटेश स्वामी मन्दिर, दादरा एवं नगर हवेली (यूनियन टेरेटरी) सिलवासा में स्थायी रूप से रहते हैं। वैष्णव धर्म के विस्तारार्थ "स्वामी धनञ्जय प्रपन्न रामानुज वैष्णव दास" के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत जी की कथा का श्रवण करने हेतु संपर्क कर सकते हैं।।

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