ठाकुर जी की कृपा एक मुश्लिम भक्त पर।।

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Bhagwan Ki Kripa Ka Praman
Bhagwan Ki Kripa Ka Praman

ठाकुर श्री मदन मोहन जी की प्रत्यक्ष कृपा एक मुश्लिम भक्त ताज खां पर।। Bhagwan Ki Kripa Ka Praman.

जय श्रीमन्नारायण,

मित्रों, राजस्थान के करौली नगर में “ठाकुर श्री मदन मोहन जी” का एक प्राचीन मंदिर है। ये वही मदन मोहन जी है जिन्हें मुगल हमले के समय वृंदावन से करौली भैजा गया था। इस मंदिर में भगवान मदन मोहन जी अर्थात् “भगवान श्री कृष्ण” विराजमान हैं।।

यहां के निवासियों में मदन मोहन के प्रति अपार श्रद्धा और आस्था है। करौली के मदनमोहन की एक कथा यहां काफी लोकप्रिय है। कथा है, कि ताज खां नाम का एक मुसलमान कृष्ण की प्रतिमा की एक झलक पाते ही उनका अनन्य भक्त बन गया।।

दोस्तों, ताज खां कचहरी में एक चपरासी था। एक बार कचहरी के काम से इन्हें मदनमोहन जी के पुजारी गोस्वामी जी के पास भेजा गया। ताज खां मंदिर के बाहर खड़े रहकर ही गोस्वामी जी को अवाज लगाने लगे।।

इसी समय उनकी नजर मंदिर में स्थित मदनमोहन जी की मूर्ति पर गयी। और वे भगवान श्री कृष्ण के सुन्दर मुखडे को देखते ही रह गये। गोस्वामी जी के आने पर उनका ध्यान भंग हुआ और कचहरी का संदेश गोस्वमी जी को देकर ताज खां विदा हो गये।।

ताज खां के मन मस्तिष्क पर मदन मोहन की ऐसी छवि बनी की वे हर पल उन्हें देखने की ताक में रहने लगे। परन्तु मुसलमान होने के कारण वो मंदिर में जाने से डरते और बाहर से ही मदनमोहन को निहारते रहते थे।।

गोस्वामी जी को जब शंका हुई कि ताज खां छुपकर मदनमोहन जी का दर्शन करते हैं। तब उन्होंने ताज खां को मंदिर आने से मना कर दिया। ताज खां गोस्वामी जी के मना करने के बाद भी दर्शन के लिए मंदिर पहुंच जाते थे।।

एक दिन एक कार्यकर्ता ने तो ताज खां को धक्का मार कर भगा भी दिया। ताज खां इससे बहुत दुःखी हुए और भोजन पानी त्याग कर मदन मोहन जी को याद करके रोते रहे। लोग कहते हैं, कि भक्त की इस लगन पर भगवान का हृदय करूणा से भर उठा।।

मंदिर का नियम होता है, कि रात्रि में आरती पूजा के बाद भगवान के सामने प्रसाद का थाल रखकर मंदिर का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया जाता है। एक दिन रात्रि पूजा के बाद जब मंदिर बंद हुआ तो भगवान ने मंदिर के कार्य कर्ता का रूप धारण किया और प्रसाद की थाल लेकर भक्त ताज खां के घर पहुंच गये।।

भगवान ने ताज खां से कहा कि गोस्वामी जी ने आपके लिए प्रसाद भेजा है। आप प्रसाद ग्रहण कर लें और सुबह थाल लेकर मंदिर में मदन मोहन जी के दर्शन के लिए पधारें। ताज खां को विश्वास नहीं हो रहा था कि गोस्वामी जी ने ऐसा कहा है।।

फिर भी ताज खां ने मंदिर के कार्यकर्ता का रूप धारण किये हुए भगवान की बात मानकर भावुक मन से प्रसाद ग्रहण कर लिया। इसके बाद भगवान वहां से विदा हो गये। दूसरी ओर गोस्वमी जी को भगवान ने स्वप्न में दर्शन देकर कहा कि वह प्रसाद की थाल ताज खां के घर छोड़ आये हैं।।

सुबह जब वह प्रसाद की थाल लेकर आए तो उसे मेरे दर्शन से मना मत करना। गोस्वामी जी सुबह उठे तो देखा सचमुच मंदिर में प्रसाद का थाल नहीं था। गोस्वामी जी दौड़कर महाराज के पास गये और सब हाल कह सुनाया।।

महाराज और गोस्वामी जी दोनों मंदिर लौट आये। मंदिर में पूजा के समय जब ताज खां आये तो उनके हाथ में प्रसाद का थाल देखकर सभी लोग हैरान रह गये। महाराज ने आगे बढ़कर ताज खां को गले से लगा लिया।।

सभी लोग भक्त ताज खां की जय जयकार कर उठे। भक्त ताज खां को आज भी करौली के भगवान श्री मदनमोहन जी के मंदिर में संध्या आरती के समय ये लाइन गाया जाता है।।

“ताज भक्त मुसलिम पै प्रभु तुम दया करी।
भोजन लै घर पहुंचे दीनदयाल हरी।।”

इस दोहे के साथ आज भी ताज खां याद किया जाता है। मित्रों, इस प्रकार की कहानियाँ न तो कोई मनोकल्पित कथा है और ना ही कोई पाखण्ड। ये सभी इतिहास हैं जो भगवान के इस संसार में होने के प्रमाण हैं।।

उपरोक्त कथा किसी ने मुझे व्हाट्सअप पर भेजा था तो मैंने भगवान पर आस्था और विश्वास रखने वालों की आस्था को और भी प्रगाढ़ होने के लिए मैंने अपने ब्लॉग पर डालना उचित समझा।।

आप सम्पूर्ण श्रद्धा, विश्वास और पूर्ण समर्पण के साथ यदि भगवान की भक्ति करते हैं, तो भगवान आपसे अलग रह ही नहीं पाते। जरुरत है केवल अपने अन्दर के विश्वास को जगाने की।।

।। सदा सत्संग करें । सदाचारी और शाकाहारी बनें । सभी जीवों की रक्षा करें ।।

नारायण सभी का नित्य कल्याण करें । सभी सदा खुश एवं प्रशन्न रहें ।।

जयतु संस्कृतम् जयतु भारतम्।।

।। नमों नारायण ।।

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