भागवत टीकाकारों का संक्षिप्त परिचय।।

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Bhagwat Ke Tikakar
Bhagwat Ke Tikakar

भागवत टीकाकारों का संक्षिप्त परिचय।। Bhagwat Ke Tikakar.

“विद्यावतां भागवते परीक्षा”।। Bhagwat Pariksha.

जय श्रीमन्नारायण,

मित्रों, भागवत विद्वत्ता की कसौटी है यथा -‘विद्यावतां भागवते परीक्षा’। इसी कारण टीकासंपत्ति की दृष्टि से भी यह अतुलनीय है। विभिन्न वैष्णव संप्रदाय के विद्वानों ने अपने विशिष्ट मत की उपपत्ति तथा परिपुष्टि के निमित्त भागवत के ऊपर स्वसिद्धांतानुयायी व्याख्याओं का प्रणयन किया है।।

जैसा कि आप सभी जानते हैं, कि भागवत एक बहुत ही कठिन विषय है। भागवत जी के ऊपर किसी भी तरह की टीका टिप्पणी करना अथवा भागवत कथा के व्यास गद्दी को ग्रहण करना यह कोई सामान्य विषय नहीं है। अच्छे-अच्छे विद्वानों की परीक्षा भागवत जी में हो जाती है। बहुत सारे ऐसे प्रसंग आते हैं, जिसके विषय में व्याख्या करना बहुत ही कठिन कार्य होता है, बुद्धि चकरा जाती है।।

परन्तु जिसके ऊपर स्वयं नारायण की संपूर्ण कृपा हो उसे कहीं कोई दिक्कत नहीं होती है। उससे भी बड़ी बात है, कि जैसा कि आपने भागवत सुना होगा तो उसमें गज और ग्राह का प्रसंग आता है। यह दोनों भगवान के हाथों मुक्त हुए हरि अवतार भगवान का हुआ इन्हें मुक्ति देने के लिए। जिसमें दोनों का अपराध यह था की गज ने एक संत को देखकर प्रणाम नहीं किया था और दूसरा जो ग्राह था उसने एक संत का पैर पकड़ लिया था।।

एक संत को प्रणाम न करने के वजह से उनके श्राप से गज बना और दूसरा संत के चरण पकड़ने के वजह से ग्राह बना। अभिप्राय यह है, कि अगर आप संतों का सानिध्य भी ग्रहण कर लेते हैं तो भी यह सौभाग्य आपके जीवन में अवश्य प्राप्त हो जाता है। इसलिए भगवान या उनके किसी भक्त के चरणों की कृपा से ही यह सौभाग्य आपको प्राप्त हो सकता है। अतः आप भागवत के वक्ता हैं या फिर श्रोता है तो बहुत ही अच्छी बात है।।

Bhagwat Ke Tikakar

लेकिन अगर वक्ता है तो स्वयं भक्ति की पराकाष्ठा को प्राप्त करें उसके बाद कथा का वाचन करें। और यदि आप श्रोता है तो भी आप पूरी निष्ठा एवं संपूर्ण समर्पण भाव से भागवत जी की कथा का श्रवण करें। तभी इसका संपूर्ण लाभ आपको प्राप्त होगा। ऐसे ही कुछ संत हमारे देश में हुए जिन्होंने भागवत जी के ऊपर अपना मत दिया है, आज आप लोगों को उन संतों का संक्षिप्त परिचय अपने इस लेख के माध्यम से मैं दे रहा हूं।।

मित्रों, कुछ टीकाकारों जिनके विषय में हमने पढ़ा और जाना है, उन भागवत जी के कुछेक टीकाकारों का नाम और संक्षिप्त परिचय बताने का प्रयत्न करता हूँ। अगर आपलोगों में से कोई भी अन्य किसी और भागवत टीकाकारों के विषय में या इन्हीं में से किसी के विषय में अधिक ज्ञान रखता हो तो हमें भी अवश्य बताएँगे।।

१.श्रीधर स्वामी (भावार्थ दीपिका; 13वीं सदी, भागवत के सबसे प्रख्यात व्याखाकार), हमारे काशी नरसिम्ह मन्दिर के पुजारी थे।।

२.सुदर्शन सूरि (14वीं सदी, की शुकपक्षीया व्याख्या विशिष्टाद्वैतमतानुसारिणी है) हमारे रामानुज श्रीवैष्णव सम्प्रदाय के प्रसिद्द आचार्य थे।।

३.सन्त एकनाथ (एकनाथी भागवत; १६ वी सदी में मराठी भाषा की उत्तम रचना) इन्होने की थी।।

४.विजय ध्वज (पदरत्नावली 16वीं सदी; माध्वमतानुयायी), मध्वाचार्य जी के द्वारा प्रचलित माध्व सम्प्रदाय के प्रसिद्द आचार्य थे।।

५.वल्लभाचार्य (सुबोधिनी 16वीं सदी; शुद्धाद्वैतवादी) इनको तो आप सभी भी जानते ही होंगे, वृन्दावन के प्रसिद्द वैष्णव संत तथा वल्लभ मत के आद्य प्रवर्तक थे।।

६.शुदेवाचार्य (सिद्धांतप्रदीप, निबार्कमतानुयायी) निम्बार्क सम्प्रदाय के प्रसिद्द आचार्य थे।।

७.सनातन गोस्वामी (बृहद्वैष्णवताषिणी), जीव गोस्वामी जी जिन्होंने क्रमसंदर्भ और दुसरे एक जिन्होंने षट्सन्दर्भ लिखा है, जिनके बारे में मुझे विशेष जानकारी तो नहीं है लेकिन वो भी हमारे रामानुज श्रीवैष्णव मतावलम्बी ही थे।।

आप सभी अपने मित्रों को फेसबुक पेज को लाइक करने और संत्संग से उनके विचारों को धर्म के प्रति श्रद्धावान बनाने का प्रयत्न अवश्य करें।।

नारायण सभी का नित्य कल्याण करें । सभी सदा खुश एवं प्रशन्न रहें ।।

जयतु संस्कृतम् जयतु भारतम्।।

।। नमों नारायण ।।

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भागवत प्रवक्ता- स्वामी धनञ्जय जी महाराज "श्रीवैष्णव" परम्परा को परम्परागत और निःस्वार्थ भाव से निरन्तर विस्तारित करने में लगे हैं। श्रीवेंकटेश स्वामी मन्दिर, दादरा एवं नगर हवेली (यूनियन टेरेटरी) सिलवासा में स्थायी रूप से रहते हैं। वैष्णव धर्म के विस्तारार्थ "स्वामी धनञ्जय प्रपन्न रामानुज वैष्णव दास" के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत जी की कथा का श्रवण करने हेतु संपर्क कर सकते हैं।।

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