देवदर्शन एवं प्रणाम करने की सही विधि।।

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Dev Darshan Ki Vidhi
Dev Darshan Ki Vidhi

देवदर्शन एवं प्रणाम करने की सही विधि।। Dev Darshan Ki Vidhi.

जय श्रीमन्नारायण,

मित्रों, आपको सुख हो या दुख, हर पल भगवान का ध्यान करने पर अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस प्रकार किया गया भगवान का चिंतन हमारे कई जन्मों पापों को नष्ट कर देता है।।

आजकल की भागती-दौड़ती जिंदगी में बहुत कम लोग हैं, जिन्हें विधिवत भगवान की पूजा-आराधना का समय मिलता होगा। वैसे तो पुण्यार्जन हेतु लगभग सभी लोग भगवान की पूजा के लिए मन्दिर जाते हैं । परन्तु कुछ लोग केवल हाथ जोड़कर प्रार्थना भर कर लेते हैं।।

जबकि भगवान के सामने साष्टांग प्रणाम करने पर आश्चर्यजनक शुभ फल कि प्राप्ति होती है। भगवान को साष्टांग प्रणाम करना केवल एक परंपरा या बंधन मात्र नहीं है। इस परंपरा के पीछे बहुत ही गहरा विज्ञान भी है जो हमारे शारीरिक, मानसिक और वैचारिक विकास से जुड़ा हुआ है।।

साष्टांग प्रणाम का सबसे बड़ा फायदा यह है, कि इससे हमारे शरीर का व्यायाम हो जाता है। साष्टांग प्रणाम की विधि यह है, कि आप भगवान के सामने बैठ जायें और फिर धीरे-धीरे पेट के बल जमीन पर लेट जायें। दोनों हाथों को सिर के आगे ले जाकर उन्हें जोड़कर नमस्कार करें। इस प्रणाम से हमारे सारे जोड़ थोड़ी देर के लिए तन जाते हैं।।

इससे स्ट्रेस (तनाव) दूर होता है इसके अलावा झुकने से सिर में रक्त प्रवाह बढ़ता है। ये रक्त प्रवाह स्वास्थ्य और आंखों के लिए अत्यन्त लाभप्रद होता है। प्रणाम करने की यही विधि सबसे ज्यादा फायदेमंद है। इसका धार्मिक महत्व काफी गहरा है, ऐसा माना जाता है, कि इससे हमारा अहंकार कम होता है।।

भगवान के प्रति हमारे मन में समर्पण का भाव आता है। अहंकार स्वत: ही धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। जब भी हम भगवान के समक्ष तन और मन से समर्पण कर देते हैं। फिर यही अवस्था निश्चित ही हमारे मन को असीम शान्ति प्रदान करती हैं। इसके अलावा इस प्रकार प्रणाम करने से हमारे जीवन की कई समस्यायें स्वत: ही समाप्त हो जाती हैं।।

।। नारायण सभी का कल्याण करें ।।

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जयतु संस्कृतम् जयतु भारतम्।।

जय जय श्री राधे।।
जय श्रीमन्नारायण।।

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भागवत प्रवक्ता- स्वामी धनञ्जय जी महाराज "श्रीवैष्णव" परम्परा को परम्परागत और निःस्वार्थ भाव से निरन्तर विस्तारित करने में लगे हैं। श्रीवेंकटेश स्वामी मन्दिर, दादरा एवं नगर हवेली (यूनियन टेरेटरी) सिलवासा में स्थायी रूप से रहते हैं। वैष्णव धर्म के विस्तारार्थ "स्वामी धनञ्जय प्रपन्न रामानुज वैष्णव दास" के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत जी की कथा का श्रवण करने हेतु संपर्क कर सकते हैं।।

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