धरती पर भगवान हैं – प्रमाण देखें।।

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Dharati Par Bhagwan Hai
Dharati Par Bhagwan Hai

धरती पर भगवान हैं – प्रमाण देखें।। Dharati Par Bhagwan Hai.

God on earth – see the proof.

जय श्रीमन्नारायण,

मित्रों, आइये आज आपको “धरती पर भगवान हैं” सिद्ध करके दिखाता हूँ। साथ ही अगर आपको विश्वास है तो वो आपको मिलेगा भी। इस बात में किसी भी प्रकार का कोई संसय नहीं है।।

भगवान के इस धरती पर उपस्थित होने का पहला प्रमाण यह है, कि “अमरनाथजी” में शिवलिंग अपने आप बनता है। अगर आप वहाँ नहीं गये हैं तो एक बार अवश्य जाइये और ईश्वर के इस अद्भुत चमत्कार को अवश्य देखिये।।

उसके इस धरती पर होने का दूसरा प्रमाण यह है, कि “माँ ज्वालामुखी” में हमेशा ज्वाला निकलती है। यहाँ भी आप अवश्य आयें और माता कि उस धधकती हुई ज्वाला को अवश्य देखें।।

“मैहर माता मंदिर” में आज भी रात को आल्हा-उदल अब भी आते हैं। यह उनको अमर होने का वरदान माता ने स्वयं दिया था। आज भी चाहे कितना भी कोई साफ-सफाई करके रात्रि में आये सुबह वहाँ पुष्प चढ़े हुये अवश्य मिलेंगे। यह प्रत्यक्ष और तीसरा प्रमाण है ईश्वर के इस धरती पर विराजमान होने के।।

सीमा पर स्थित तनोट माता मंदिर में 3000 बम में से एक का भी ना फूटना। हमारे किसी सेना के जवान से पूछ लेना यह बात कितना सत्य है? यह बात प्रमाणित करता है ईश्वर के इस धरती पर होने के। यह चौथा और प्रत्यक्ष प्रमाण है।।

अभी दो वर्ष पहले ही इतने बड़े हादसे के बाद भी “केदारनाथ मंदिर” का बाल भी बांका ना होना। सब कुछ जहां बर्बाद हो गया यहाँ तक कि कोई जिंदा इन्सान नहीं बचा। वहाँ मन्दिर पर आंच तक नहीं आयी। यह ईश्वर के इस धरती पर होने का पंचम प्रमाण है।।

पूरी दुनियां में आज भी सिर्फ “रामसेतु के पत्थर” ही पानी में तैरते हैं। ऐसा क्यों है? जबकि विज्ञान कहाँ से कहाँ चला गया। यह इस बात का प्रमाण है, कि ईश्वर कि सत्ता आज भी इस संसार में है। यह छठा प्रमाण है ईश्वर के होने का।।

समुद्र के लहरों को कभी देखना, जब भी उफनता है, बहुत कुछ समेटकर अपने साथ ले जाता है। परंतु “रामेश्वरम धाम” में सागर का कभी उफान न मारना इस बात का सातवाँ प्रमाण है, कि ईश्वर इस संसार में है।।

जगन्नाथ पूरी में जहां भगवान जगन्नाथ आज भी विराजमान हैं, उस “पुरी के मंदिर” के ऊपर से किसी भी पक्षी या विमान का न निकल पाना। यह अपने-आप में इस बात का अष्टम प्रमाण है, कि ईश्वर इस संसार में आज भी है।।

साथ ही इस बात पर भी गौर करना कि “पुरी मंदिर” की पताका सदैव हवा के विपरीत दिशा में ही क्यूँ फहराता है। विज्ञान के सारे-के-सारे ज्ञान धरे-के-धरे रह जाएंगे। यह इस बात का नवम प्रमाण है, कि इस धरती पर आज भी भगवान हैं।।

कभी आप महाकाल कि नगरी उज्जैन में गये होंगे तो आपने सुना अथवा देखा अवश्य होगा। उज्जैन में “बाबा भैरोंनाथ” का मदिरा पीना। यह अपने आप में ईश्वर के इस धरती पर प्रत्यक्ष होने का दसवाँ प्रत्यक्ष प्रमाण है।।

ग्यारहवाँ और प्रत्यक्ष प्रमाण आपकी आँखों के सम्मुख है। गंगा नदी के पानी का कभी खराब न होना। चाहे किसी भी तरह का कहीं का भी जल हो कुछ दिनों में खराब अवश्य ही हो जाता है। परंतु ऐसा क्या है गंगाजल में जो कभी खराब नहीं होता। मेरे घर में दस वर्ष पहले का हरिद्वार से लाया हुआ गंगाजल है। और वह आज भी वैसा ही है, जैसा लेकर आये थे। इससे बड़ा और कौन सा प्रमाण चाहिए आपको हमारे ईश्वर के इस धरती पर होने के।।

श्री राम नाम धन संग्रह बैंक में संग्रहीत इकतालीस अरब राम नाम मंत्र पूरित ग्रंथों को (कागज होने पर भी) चूहों द्वारा नहीं काटा जाना। जबकि अनेक चूहे अंदर घुमते रहते है।।

।। सदा सत्संग करें । सदाचारी और शाकाहारी बनें । सभी जीवों की रक्षा करें ।।

नारायण सभी का नित्य कल्याण करें । सभी सदा खुश एवं प्रशन्न रहें ।।

जयतु संस्कृतम् जयतु भारतम्।।

।। नमों नारायण ।।

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भागवत प्रवक्ता- स्वामी धनञ्जय जी महाराज "श्रीवैष्णव" परम्परा को परम्परागत और निःस्वार्थ भाव से निरन्तर विस्तारित करने में लगे हैं। श्रीवेंकटेश स्वामी मन्दिर, दादरा एवं नगर हवेली (यूनियन टेरेटरी) सिलवासा में स्थायी रूप से रहते हैं। वैष्णव धर्म के विस्तारार्थ "स्वामी धनञ्जय प्रपन्न रामानुज वैष्णव दास" के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत जी की कथा का श्रवण करने हेतु संपर्क कर सकते हैं।।

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