अथ श्री गरुड कवचम्।।

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Garuda kavacham
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सर्प-कालसर्प एवं ग्रह दोष निवारक – श्री गरुड कवचम्।। Garuda kavacham.

जय श्रीमन्नारायण,

मित्रों, इस गरुण कवच को प्रातः स्नान करके जो कोई व्यक्ति भी पाठ करता है उसके जीवन से हर प्रकार के विष दोष का नाश हो जाता है। अगर इस कवच का दिन में तीन बार कोई पाठ करता है तो उसके जीवन में हर प्रकार के बंधन से वह मुक्त हो जाता है। इस स्तोत्र का श्रद्धा से नित्य पाठ करने वाला व्यक्ति दुनिया के संपूर्ण पापों से मुक्त होकर भगवान विष्णु के सानिध्य को प्राप्त करता है। किसी भी प्रकार के कालसर्प आदि दोष अथवा ग्रह बाधा दोष आदि सब की सहज ही शांति हो जाती है इसमें कोई संशय नहीं है।।

अथ गरुड कवचम्।।

अथ विनियोगः – अस्य श्रीगरुडकवचस्तोत्रमन्त्रस्य। नारद भगवान् ऋषिः। वैनतेयो देवता। अनुष्टुप्छन्दः। श्रीवैनतेयप्रीत्यर्थे जपे विनियोगः।।

Garuda kavacham

ॐ शिरो मे गरुडः पातु ललाटे विनितासुतः।
नेत्रे तु सर्पहा पातु कर्णौ पातु सुराहतः॥१॥

नासिकां पातु सर्पारिः वदनं विष्णुवाहनः।
सूर्येतालू च कण्ठे च भुजौ पातु महाबलः॥२॥

हस्तौ खगेश्वरः पातु कराग्रे तरुणाकृतिः॥३॥

स्तनौ मे विहगः पातु हृदयं पातु सर्पहा।
नाभिं पातु महातेजाः कटिं मे पातु वायुनः॥४॥

ऊरू मे पातु उरगिरिः गुल्फौ विष्णुरथः सदा।
पादौ मे तक्षकः सिद्धः पातु पादाङ्गुलींस्तथा॥५॥

रोमकूपानि मे वीरो त्वचं पातु भयापहा।
इत्येवं कवचं दिव्यं पापघ्नं सर्वकामदम्॥६॥

यः पठेत्प्रातरुत्थाय विषदोषं न पश्यति।
त्रिसन्ध्यं पठते नित्यं बन्धनात् मुच्यते नरः।
द्वादशाहं पठेद्यस्तु मुच्यते सर्वकिल्विषैः॥७॥

Garuda kavacham

।। इति श्रीनारदगरुडसंवादे गरुडकवचं सम्पूर्णम् ।।

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नारायण सभी का नित्य कल्याण करें । सभी सदा खुश एवं प्रशन्न रहें ।।

जयतु संस्कृतम् जयतु भारतम्।।

।। नमों नारायण ।।

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भागवत प्रवक्ता- स्वामी धनञ्जय जी महाराज "श्रीवैष्णव" परम्परा को परम्परागत और निःस्वार्थ भाव से निरन्तर विस्तारित करने में लगे हैं। श्रीवेंकटेश स्वामी मन्दिर, दादरा एवं नगर हवेली (यूनियन टेरेटरी) सिलवासा में स्थायी रूप से रहते हैं। वैष्णव धर्म के विस्तारार्थ "स्वामी धनञ्जय प्रपन्न रामानुज वैष्णव दास" के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत जी की कथा का श्रवण करने हेतु संपर्क कर सकते हैं।।

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