कल ओ माय गॉड नाम का चलचित्र देखा।।

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I Seen O my God movie
I Seen O my God movie

कल मैंने “ओ माय गॉड” नाम का एक तथाकथित चलचित्र देखा ।। I Seen O my God movie.

जय श्रीमन्नारायण, BHAGWAT KATHA – SWAMI DHANANJAY MAHARAJ.

मित्रों, आर्य संतान जिन्हें हिंदू कहा जाता है, में कौन ऐसा होगा जो वेद का आदर न करता हो? इस बात का अभिमान न करता हो कि हमारे धर्म का मूल वेद है। बीच के समय में कुछ तथाकथित लोगों ने वैष्‍ण्‍ाव, शैव, शाक्त आदि के नाम पर वैदिक धर्म में बहुत अधिक भेद और अनैक्‍य फैला दिया था। परन्तु वेद के मानने में सब एक हो जाते हैं।।

यहाँ तक कि सभी लोग अपने-अपने संप्रदाय का मूल भी वेद को ही मानते हैं। जब तक हम वैदिक पथ का अनुसरण करते रहे हिंदू जाति सदैव प्रबल बनी रही। लेकिन उधर बौद्ध और जैन धर्म का उभरना इधर क्रिश्चन और इस्लाम मिशनरी के दु:ष्प्रचार ने लोगों में ऐसी भेद बुद्धि पैदा कर दी कि हम शनैः-शनैः क्षीण होते गए। हमें लगता है, कि इसे रोकने का प्रयास आज के समय में सबसे बड़ा धर्म है।।

कल मैंने “ओ माय गॉड” नाम का एक तथाकथित चलचित्र देखा। बच्चे देख रहे थे, तो हम भी बैठे गये। अब बैठ गए तो बैठ गए। क्योंकि अगर धर्म के विषय में कोई कुछ कहे तो सुनना तो पड़ेगा ही। परन्तु मुझे ये समझ में नहीं आता कि लोग ऐसे लोगों कि बातें सुनते और देखते ही क्यों है? क्योंकि मैंने इस बात कि चर्चा कि कुछ अपने मित्रों से तो पता चला कि इस प्रकार के चलचित्र को निर्मित करने में सैकड़ों से हजारों करोड़ रुपये लग जाते हैं।।

जो दस रूपये के दूध शिवलिंग पर चढ़ाने का विरोध करते हैं। कि ये दूध बर्बाद हो रहा है, अगर किसी गरीब को पिलाया जाय तो? अर्थात इस तरह सैकड़ों प्रकार के अनर्गल प्रलाप करते रहते हैं। लेकिन मेरा ये मानना है, कि अगर सच में ऐसे लोगों को गरीबों से प्रेम अथवा गरीबी को मिटाने में कोई रूचि होती तो ये इस तरह के अनर्गल प्रलाप के अलावा सच में कुछ काम करते।।

ऐसे लोग जितना खर्च करके इस प्रकार के बेतुके कार्य को करते हैं। लोगों के भावनाओं को उनकी श्रद्धा को अश्रद्धा में बदलकर एक अच्छा इन्सान बनने से भी रोकने का काम करते हैं। उससे बहुत ही कम खर्चे में मुम्बई की सडकों पर बैठे भिखारियों का घर बश जाता। लेकिन सच में न तो इन्हें गरीबों के प्रति कोई हमदर्दी है और ना ही गरीबी हटाने में कोई रूचि है।।

इनका एक ही उद्देश्य है, पैसा कमाना। फिर चाहे उसके लिए किसी की भावनाओं से खेलना पड़े। अथवा अपना इमान ही क्यों न बेचना पड़े। और इतना ही नहीं मुझे लगता है, कि एवं हर जगह देखने में भी आता है तथा सुनने को भी मिलता है, कि दुसरे धर्मों के लोग जो किसी भी तरीके से बचे-खुचे हिन्दुओं को खरीदने में लगे हैं। ऐसे लोगों के हाथों बिके हुए लोग हैं ये।।

मित्रों, इस प्रकार के चलचित्र आदि का निर्माण उसी प्रकार के अवैध तरीके से आये हुए पैसों के बल से निर्मित किया जाता है। उसी से भोले-भाले लोगों के मन में भ्रम का बीज बोया जाता है और कुछ भी नहीं है इन सभी बातों में। चलिए मित्रों, आप सभी सावधान रहें तथा धर्म के प्रति समर्पित रहने का प्रयास करें। क्योंकि धर्म नहीं होगा तो ये सृष्टि के होने का कोई अर्थ ही नहीं होगा। मानवता समाप्त हो जाएगी, इंसानियत की दुर्दशा तो आप अभी से ही देख रहे हैं।।

जबकि अभी भी बहुत बड़ी मात्रा में धर्म बाकि है। तो फिर कल्पना कीजिये उस दिन की जब धर्म नहीं होगा तो क्या स्थिति होगी। और सबसे बड़ी बात धर्म वही है, जो मानवता, इंसानियत तथा भाईचारा सिखाए। जो इंसानियत का गला घोंटे वो धर्म कदापि नहीं हो सकता। इसलिए ऐसे किसी असामाजिक संगठन को धर्म कहकर इस पवित्र शब्द को अपवित्र न करें। आप सभी अपने मित्रों को संत्संग से उनके विचारों को धर्म के प्रति श्रद्धावान बनाने का प्रयत्न अवश्य करें।।

।। सदा सत्संग करें । सदाचारी और शाकाहारी बनें । सभी जीवों की रक्षा करें ।।

नारायण सभी का नित्य कल्याण करें । सभी सदा खुश एवं प्रशन्न रहें ।।

जयतु संस्कृतम् जयतु भारतम्।।

।। नमों नारायण ।।

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भागवत प्रवक्ता- स्वामी धनञ्जय जी महाराज "श्रीवैष्णव" परम्परा को परम्परागत और निःस्वार्थ भाव से निरन्तर विस्तारित करने में लगे हैं। श्रीवेंकटेश स्वामी मन्दिर, दादरा एवं नगर हवेली (यूनियन टेरेटरी) सिलवासा में स्थायी रूप से रहते हैं। वैष्णव धर्म के विस्तारार्थ "स्वामी धनञ्जय प्रपन्न रामानुज वैष्णव दास" के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत जी की कथा का श्रवण करने हेतु संपर्क कर सकते हैं।।

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