मोहन क्या अपराध हमारा जो इतना तुम सताते हो।।

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Mohan Kya Aparadh Hamara
Mohan Kya Aparadh Hamara

मोहन  क्या अपराध हमारा जो इतना तुम सताते हो ।। Mohan Kya Aparadh Hamara Jo Tum Itana Satate Ho.

जय श्रीमन्नारायण,

              प्यारे कन्हैया,

मोहन क्या अपराध हमारा जो इतना तुम सताते हो…
अपनी इक झलक के लिए जन्मो से हमे तड़पाते हो…
मोहन क्या अपराध हमारा जो इतना तुम सताते हो…

बंसी की मधुर धुन से रागिनियों को बजाते हो…
अपनी बंसी की धुन बजा हमे पागल बनाते हो…
मोहन क्या अपराध हमारा जो इतना तुम सताते हो…

Mohan Kya Aparadh Hamara

बंसी को भी तुम अधरामृत पिलाते हो…
उसे होंठो से छूकर उसे धन्य बनाते हो…
मोहन क्या अपराध हमारा जो इतना तुम सताते हो…

और हमको तुम चरणों से भी क्यों दूर बिठाते हो…
हमारा दिल छीन कर क्यों यूँ मुस्कराते हो…
मोहन क्या अपराध हमारा जो इतना तुम सताते हो…

हमारे सजल नेत्रों से अश्रु जल गिराते हो…
मोहन क्या अपराध हमारा जो इतना तुम सताते हो…

मोहन मेरे मन में समा जाओ मोहे ना इतना सताओ..
प्यारे आ जाओ आ जाओ… प्यारे आ जाओ आ जाओ…
प्यारे आ जाओ आ जाओ… प्यारे आ जाओ आ जाओ…

प्यारे आ जाओ आ जाओ… प्यारे आ जाओ आ जाओ…
प्यारे आ जाओ आ जाओ… प्यारे आ जाओ आ जाओ…

क्योंकि प्यारे आपके बिना हमारा कोई आस्तित्व ही नहीं बचता ।।

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जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।

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