अथ मृतसञ्जीविनी मन्त्रः।।

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Mrit Sanjivani Mantra
Mrit Sanjivani Mantra

अथ मृतसञ्जीविनी मन्त्रः।। Mrit Sanjivani Mantra.

शुक्र ऋषिः, गायत्री छन्दः, मृतसञ्जीवनी देवी देवता।
ह्रीं बीजं, स्वाहा शक्तिः, हंसः कीलकं, न्यासं मूलेन।।

विनियोगः समाख्यात स्त्रिचतुश्चैककं पुनः।
षट् चतु द्विककेनैव षडङ्गानि समाचरेत्।।

१ ह्रीं हंसः, २ सञ्जीविनि, ३ जूं, ४ जीवम्प्राणग्रन्थिं, ५ कुरु स्वाहा ।

ह्रीं हंसः, सञ्जीविनि, जूं हंसः कुरु कुरु, कुरु सौः सौः, स्वाहा।।

।। नारायण सभी का कल्याण करें ।।

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जयतु संस्कृतम् जयतु भारतम्।।

जय जय श्री राधे।।
जय श्रीमन्नारायण।।

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