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जीव को पवित्र करनेवाला परम् ज्ञान क्या है?

जीव को पवित्र करनेवाला वो परम् ज्ञान क्या है?।। Param Gyan Kya Hai. जय श्रीमन्नारायण, मित्रों, गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं, न हि ज्ञानेन सदृशं...

बद्रीनाथ का हजारों वर्ष पुराना इतिहास।।

बद्रीनाथ का हजारों वर्ष पुराना इतिहास।। Bhagwan Badrinath Ka History Thousands years old History of badrinath. जय श्रीमन्नारायण, Swami Dhananjay Maharaj. बद्रीनाथ का इतिहास हजारों वर्ष पुराना...

क्यों नहीं है, भगवान जगन्नाथ के हाथ-पैर?।।

क्यों नहीं है, भगवान जगन्नाथ के हाथ-पैर?।। Bhagwan Jagannath Ke Hath Pair. जय श्रीमन्नारायण, Why is there no arms and legs of Lord Jagannath मित्रों, अपने...

भारतीय संस्कार वाली नारी का महत्त्व।।

भारतीय संस्कार वाली नारी का महत्त्व।। Bharatiy Nari. जय श्रीमन्नारायण, मित्रों, दुनिया में तरह तरह के लोग रहते हैं। जिसमें हमलोग भी हैं। यहाँ तरह तरह...

जाती प्रमाण के विषय में।।

जाती प्रमाण के विषय में।। Aapki Jati Kya Hai. जय श्रीमन्नारायण, Sansthanam - Sanchalak - Bhagwat Pravakta - Swami Dhananjay Maharaj. न जारजातस्य ललाटशृंगं कुल प्रसूतेर्न च...

ग्रह बाधा दूर करने का सहज उपाय रुद्राक्ष।।

ग्रह बाधा दूर करने का सहज उपाय रुद्राक्ष।। Rudaksh Se Grah Badha Dur Hogi. नमों नारायणाय, रुद्राक्ष धारयेद्बुध: -- इस सूत्र के अनुसार ज्ञानी जनों को रुद्राक्ष...

ब्रह्मज्ञान क्या है तथा कैसे प्राप्त हो?।।

ब्रह्मज्ञान क्या है तथा कैसे प्राप्त हो?।। Brahmagyan Kya Hai. जय श्रीमन्नारायण, मित्रों, रोमन ग्रन्थ में एक कहानी मिलती है। क्योंकि रोमन सभ्यता हमारी वादिक सभ्यता...

ज्ञान और मुक्ति के बीच का मार्ग कर्म ही है।।

ज्ञान और मुक्ति के बीच का मार्ग कर्म ही है।। Gyan Mukti Aur Karma. जय श्रीमन्नारायण, यस्य नास्ति स्वयं प्रज्ञा शास्त्रं तस्य करोति किम्।। लोचनाभ्यां विहीनस्य दर्पणः...

तथाकथित ज्ञानियों को भगवान का गीता में सन्देश।।

तथाकथित ज्ञानियों को भगवान का गीता में सन्देश।। Gyaniyon Ko Gita Ka Sandesh. जय श्रीमन्नारायण, सक्ताः कर्मण्यविद्वांसो यथा कुर्वन्ति भारत।। कुर्याद्विद्वांस्तथासक्तश्चिकीर्षुर्लोकसंग्रहम्‌।। अर्थ : हे भारत! कर्म में आसक्त...

यज्ञ से ही सृष्टि का संतुलन संभव?

यज्ञ से ही सृष्टि का संतुलन संभव?।। Yagya Hi Jivan Hai. जय श्रीमन्नारायण, मित्रों, यज्ञ एवं वनस्पतियाँ दो ही ऐसे उपाय हैं, जो प्रकृति को सुचारू...

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