LATEST ARTICLES

माया महा ठगनी हम जानीं।।

माया महा ठगनी हम जानीं।। Maya Thagini Hai. जय श्रीमन्नारायण, दैवी ह्येषा गुणमयी मम माया दुरत्यया। मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते॥गीता अ.७.श्लोक,१३. अर्थ : हे अर्जुन! क्योंकि...

कर्म एवं सन्यास योग की परिभाषा।।

कर्म एवं सन्यास योग की परिभाषा।। Karm And Sanyas Yoga. जय श्रीमन्नारायण, सन्न्यासं कर्मणां कृष्ण पुनर्योगं च शंससि। यच्छ्रेय एतयोरेकं तन्मे ब्रूहि सुनिश्चितम्‌।। अर्थ:- अर्जुन बोले- हे कृष्ण!...

शास्त्र ज्ञान से ही समाज का हित संभव।।

शास्त्र ज्ञान से ही समाज का हित संभव।। Shastra Samaj Ka Hit Chintak. जय श्रीमन्नारायण, त्रैविद्या मां सोमपाः पूतपापा यज्ञैरिष्ट्‍वा स्वर्गतिं प्रार्थयन्ते।। ते पुण्यमासाद्य सुरेन्द्रलोकमश्नन्ति दिव्यान्दिवि देवभोगान्‌।।...

भगवान के स्वरुपों द्वारा प्रकृति का सन्देश।।

भगवान के स्वरुपों द्वारा प्रकृति का सन्देश।। Bhagwan Ke Rupon Se Prakriti Ka Sandesh. Nature;s message through the forms of God. जय श्रीमन्नारायण, मित्रों, हमारे वैदिक सनातन...

शिव आराधना का श्रेष्ठ स्तोत्र।।

अथ श्रीरूद्राष्टकम: शिव आराधना का श्रेष्ठ स्तोत्र।। Shri Rudra Ashtakam. जय श्रीमन्नारायण, नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं॥ निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं। चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहं || १ || अर्थ:-हे...

मूर्ति पूजा के बहिष्कारकों को जबाब।।

मूर्ति पूजा के बहिष्कारकों को जबाब।। Murtipujak Hun Garv Hai. जय श्रीमन्नारायण, लाडली अपने चरणों में रख लो मुझे... इस पतित का भी उद्धार हो जायेगा। तेरे...

मनुष्य का मन एक प्रेत है।।

मनुष्य का मन एक प्रेत है।। Manav Man Ek Bhut Hai. जय श्रीमन्नारायण, एवं ज्ञात्वा कृतं कर्म पूर्वैरपि मुमुक्षुभिः। कुरु कर्मैव तस्मात्वं पूर्वैः पूर्वतरं कृतम्‌॥ (गीता.अ.४.श्लोक.१५.) अर्थ:- पूर्वकाल...

श्रेष्ठजनों का आचरण ही प्रमाण होता है।।

श्रेष्ठजनों का आचरण ही प्रमाण होता है।। Acharan Hi Praman Hai. जय श्रीमन्नारायण, Conduct is the proof यस्त्वात्मरतिरेव स्यादात्मतृप्तश्च मानवः। आत्मन्येव च सन्तुष्टस्तस्य कार्यं न विद्यते॥ (गीता अ.३.श्लोक.१७.) अर्थ:-...

आपके कर्म से ही आपका भाग्य बनता है।।

आपका कर्म ही आपका भाग्य निर्धारित करता है।। Apaka Karm Hi Apaka Bhagya Hai. जय श्रीमन्नारायण, त्यक्त्वा कर्मफलासङ्गं नित्यतृप्तो निराश्रयः। कर्मण्यभिप्रवृत्तोऽपि नैव किंचित्करोति सः॥ (गीता - अ.४.श्लोक.२०.) अर्थ-:...

कर्म की परिभाषा तथा कर्म और ज्ञान में अंतर।।

कर्म की परिभाषा तथा कर्म और ज्ञान में अंतर।। Karma Ki Paribhasha Aur Gyan. जय श्रीमन्नारायण, यस्य सर्वे समारम्भाः कामसंकल्पवर्जिताः। ज्ञानाग्निदग्धकर्माणं तमाहुः पंडितं बुधाः॥ (गीता अ.४.श्लोक.१९.) अर्थ:- जिसके...

Most Popular

सभी की नज़रों में अच्छा कैसे बनें रहें।।

सभी की नज़रों में अच्छा कैसे बनें रहें।। SAbki Najaro Me Achchhe Bane. जय श्रीमन्नारायण, मित्रों, एक बार कक्षा दस की हिंदी शिक्षिका अपने छात्र को...

जानते हुए भूलकर भी अधर्म ना करें।।

जानते हुए भूलकर भी अधर्म ना करें।। Dharm Kare Adharm Nahi. जय श्रीमन्नारायण, मित्रों, एक बार की बात है, एक जंगल की राह से एक जौहरी...

देवालय-निर्माण से प्राप्त होने वाले फल।।

देवालय-निर्माण से प्राप्त होने वाले फल।। Mandir Nirman Ka Fal. जय श्रीमन्नारायण, मित्रों, भगवान् लक्ष्मीनारायण अथवा वासुदेव आदि विभिन्न स्वरूपों के निमित्त मंदिर का निर्माण कराने...

मत्स्य अवतार का रहस्य।।

मत्स्य अवतार का रहस्य।। Matsya Avatar Ka Rahasya. जय श्रीमन्नारायण, मित्रों, एक बार एक बहुत बड़े दैत्य ने वेदों को चुरा लिया। उस दैत्य का नाम...
error: Content is protected !!