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शास्त्र ज्ञान से ही समाज का हित संभव।।

शास्त्र ज्ञान से ही समाज का हित संभव।। Shastra Samaj Ka Hit Chintak. जय श्रीमन्नारायण, त्रैविद्या मां सोमपाः पूतपापा यज्ञैरिष्ट्‍वा स्वर्गतिं प्रार्थयन्ते।। ते पुण्यमासाद्य सुरेन्द्रलोकमश्नन्ति दिव्यान्दिवि देवभोगान्‌।।...

भगवान के स्वरुपों द्वारा प्रकृति का सन्देश।।

भगवान के स्वरुपों द्वारा प्रकृति का सन्देश।। Bhagwan Ke Rupon Se Prakriti Ka Sandesh. Nature;s message through the forms of God. जय श्रीमन्नारायण, मित्रों, हमारे वैदिक सनातन...

शिव आराधना का श्रेष्ठ स्तोत्र।।

अथ श्रीरूद्राष्टकम: शिव आराधना का श्रेष्ठ स्तोत्र।। Shri Rudra Ashtakam. जय श्रीमन्नारायण, नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं॥ निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं। चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहं || १ || अर्थ:-हे...

मूर्ति पूजा के बहिष्कारकों को जबाब।।

मूर्ति पूजा के बहिष्कारकों को जबाब।। Murtipujak Hun Garv Hai. जय श्रीमन्नारायण, लाडली अपने चरणों में रख लो मुझे... इस पतित का भी उद्धार हो जायेगा। तेरे...

मनुष्य का मन एक प्रेत है।।

मनुष्य का मन एक प्रेत है।। Manav Man Ek Bhut Hai. जय श्रीमन्नारायण, एवं ज्ञात्वा कृतं कर्म पूर्वैरपि मुमुक्षुभिः। कुरु कर्मैव तस्मात्वं पूर्वैः पूर्वतरं कृतम्‌॥ (गीता.अ.४.श्लोक.१५.) अर्थ:- पूर्वकाल...

श्रेष्ठजनों का आचरण ही प्रमाण होता है।।

श्रेष्ठजनों का आचरण ही प्रमाण होता है।। Acharan Hi Praman Hai. जय श्रीमन्नारायण, Conduct is the proof यस्त्वात्मरतिरेव स्यादात्मतृप्तश्च मानवः। आत्मन्येव च सन्तुष्टस्तस्य कार्यं न विद्यते॥ (गीता अ.३.श्लोक.१७.) अर्थ:-...

आपके कर्म से ही आपका भाग्य बनता है।।

आपका कर्म ही आपका भाग्य निर्धारित करता है।। Apaka Karm Hi Apaka Bhagya Hai. जय श्रीमन्नारायण, त्यक्त्वा कर्मफलासङ्गं नित्यतृप्तो निराश्रयः। कर्मण्यभिप्रवृत्तोऽपि नैव किंचित्करोति सः॥ (गीता - अ.४.श्लोक.२०.) अर्थ-:...

कर्म की परिभाषा तथा कर्म और ज्ञान में अंतर।।

कर्म की परिभाषा तथा कर्म और ज्ञान में अंतर।। Karma Ki Paribhasha Aur Gyan. जय श्रीमन्नारायण, यस्य सर्वे समारम्भाः कामसंकल्पवर्जिताः। ज्ञानाग्निदग्धकर्माणं तमाहुः पंडितं बुधाः॥ (गीता अ.४.श्लोक.१९.) अर्थ:- जिसके...

कर्म और पाखण्ड में क्या भेद है।।

कर्म और पाखण्ड में क्या भेद है।। Karm Aur Pakhand Me Bhed. जय श्रीमन्नारायण, न मां कर्माणि लिम्पन्ति न मे कर्मफले स्पृहा। इति मां योऽभिजानाति कर्मभिर्न स...

भगवान नारायण की स्तुति एवं दस अवतार।।

भगवान नारायण की स्तुति एवं दस अवतार।। Bhagwan Vishnu Stutiyan. यं ब्रह्मा वरुणेन्द्ररुद्रमरुत: स्तुन्वन्ति दिव्यै: स्तवै- र्वेदै: साङ्गपदक्रमोपनिषदैर्गायन्ति यं सामगा:। ध्यानावस्थिततद्गतेन मनसा पश्यन्ति यं योगिनो- यस्यान्तं न विदु:...

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मत्स्य अवतार का रहस्य।।

मत्स्य अवतार का रहस्य।। Matsya Avatar Ka Rahasya. जय श्रीमन्नारायण, मित्रों, एक बार एक बहुत बड़े दैत्य ने वेदों को चुरा लिया। उस दैत्य का नाम...

खुशियों तक पहुंचने वाले मार्ग।।

खुशियों तक पहुंचने वाले मार्ग।। Khushiyon Ke Marg. जय श्रीमन्नारायण, मित्रों, कभी-कभी बहुत छोटे-छोटे सूत्र हमें जिंदगी के बड़े सबक सिखा जाते हैं। यह आवश्यक नहीं...

प्यार के रिश्ते आखिर टूटते क्यों हैं।।

प्यार के रिश्ते आखिर टूटते क्यों हैं।। Pyar Ke Riste Tutate Kyon Hai. जय श्रीमन्नारायण, मित्रों, नारद भक्तिसूत्र में नारद जी ने प्रेम की व्याख्या अपने...

चरित्र ही मानव जीवन की स्थायी निधि है।।

चरित्र ही मानव जीवन की स्थायी निधि है।। Charitra Hi Manushy Ka Dhan Hai. जय श्रीमन्नारायण, Character is the permanent fund of human life. मित्रों, सद्भावना...
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