राधे रानी के चरण रज की महिमा।।

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Radhe Rani Ke Charan Raj
Radhe Rani Ke Charan Raj

राधे रानी के चरण रज की महिमा।। Radhe Rani Ke Charan Raj.

जय श्रीमन्नारायण,

मित्रों, एक बार ठाकुर जी और राधा रानी रास के बाद निधिवन से वापिस आ रहे थे। रास्ते में चलते हुये अचानक ठाकुर जी की नजर राधा रानी के चरणों पर पड़ी। राधा रानी के श्री चरणों में बृज रज लगी थी।।

यमुना किनारे पंहुच कर ठाकुर जी ने राधा रानी से कहा – किशोरी जी आपके चरणों में बृज रज लगी है। आप यमुना जल में अपने चरण धो लीजिए। तो राधा रानी ने साफ मना कर दिया।।

बार बार ठाकुर जी चरण धोने को कहते और राधा रानी मना कर देती। जब ठाकुर जी ने इसका कारण पूछा तो राधा रानी ने बहुत सुंदर जवाब दिया। कहा कि जो एक बार मेरे चरणों से लग जाए मैं उसे कभी दूर नहीं करती।।

मित्रों, ऐसी प्यारी हमारे राधे रानी के चरणों में क्या आप लगना नहीं चाहेंगे? यह राधे कौन हैं? मेरे परम प्यारे मुरली मनोहर की आह्लादिनी शक्ति ही तो है। इसी बात पर आप सभी प्रेम से बोलें- श्री राधे।।

राधे रानी के तो नाम की महिमा का गुणगान करते मेरे प्यारे कभी थकते नहीं। जीवन पर्यंत पूरा भागवत पुराण पढ़ो लो आप जहां भी देखोगे कहीं भी किसी भी प्रसंग में अगर मौका मिलता है तो मेरे प्यारे वहां शुरू हो जाते हैं।।

मेरे प्यारे कहीं भी राधे रानी की महिमा का गुणगान करने लगते हैं। जब भी कभी फुर्सत में होते हैं और कोई भक्त मिल जाता है तो वहां पर केवल और केवल राधे रानी के गुणों का बखान ही करने में लग जाते हैं।।

ऐसी हैं, मेरी प्यारी राधा रानी! एक बार इनके चरणों से जुड़ने का प्रयत्न करो। जीवन में यदि एक बार भी आप गलती से भी अगर जुड़ गए तो फिर दोबारा कभी अपने आप को वहां से छुड़ाकर जा नहीं सकते।।

यही सच्ची भक्ति भी है और यही भगवान की भगवत्ता भी है। जो अपने भक्तों को कभी छोड़ता नहीं है। तो आप अपने जीवन में श्री जी के चरणों में लगने का दृढ़ संकल्प कर लीजिए। और हमारी प्यारी श्री जी से जुड़ जाइए।।

।। सदा सत्संग करें । सदाचारी और शाकाहारी बनें । सभी जीवों की रक्षा करें ।।

नारायण सभी का नित्य कल्याण करें । सभी सदा खुश एवं प्रशन्न रहें ।।

जयतु संस्कृतम् जयतु भारतम्।।

।। नमों नारायण ।।

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