सभी की अपनी-अपनी प्रतिभा होती है।।

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SabaKa Apna Tallent hota hai
SabaKa Apna Tallent hota hai

हर व्यक्ति की अपनी-अपनी अलग प्रतिभा होती है।। SabaKa Apna Alag Tallent hota hai.

जय श्रीमन्नारायण,
मित्रों, अगर आपको लगता है, कि आपको अपने साथियों के मुकाबले बहुत ही कम चीजें आती हैं । उनके स्तर तक पहुंचने के लिए आपको बहुत लंबा समय लगेगा तो इस तरह दूसरों के साथ तुलना करने के बजाय आपको समझिये ।।
इस बात को आपको समझना चाहिए, कि उनके और आपके स्तर में फर्क है । आपके और आपके दोस्त दोनों की प्राथमिकताएं भी अलग-अलग हैं । समान परिस्थितियों में रहने वाले दो लोग भी एक स्तर पर नहीं होते हैं ।।
इसलिए खुद को दूसरों से कम समझने के भाव से आपको उबरना चाहिए । इसके साथ यह बात भी है, कि सिर्फ आप अकेले नहीं हैं । दूसरों से इस तरह की तुलना करके दबाव में आनेवाले बहुत से लोग हैं । बल्कि ऐसा लगभग सभी लोगों के साथ होता है ।।
SabaKa Apna Tallent hota hai
मुश्किल उन्हीं लोगों के साथ पेश आती है जो खुद को मूल्यहीन समझ बैठते हैं । इसलिए जरूरी यह है, कि खुद को मूल्यहीन न समझें । हर व्यक्ति में कोई न कोई खूबी होती ही है । मान लीजिए कि आप मार्केटिंग में बहुत अच्छे नहीं हैं ।।
इसी कारण अगर आप खुद को साबित न करने का दबाव महसूस करते हैं । लेकिन हो सकता है, कि आप दूसरों के साथ तालमेल में माहिर हों । अक्सर हम अपने भीतर उन्हीं गुणों को तलाशते हैं जो हमें दूसरों में दिखाई देते हैं ।।
हम उन गुणों की तलाश नहीं करते जो हमारे भीतर होता हैं । हम दूसरों के गुणों को तो देख लेते हैं । लेकिन कई बार अपने गुणों की तरफ ही नजर नहीं जाती है । ऐसे में अपनी क्षमताओं और योग्यताओं को पहचानने की जरूरत है ।।
इसे यूं समझिए कि आप अपने भाई, बहन, पिता, टीचर, बॉस की तरह नहीं हैं । आपकी परवरिश और आपका स्वभाव दूसरों से अलग ही होगा । हर व्यक्ति दूसरे से अलग होता है । ऐसे में अपने को कम आंकने का कोई अर्थ नहीं है ।।
बल्कि अपने गुणों को पहचानकर उसके उपर पुरे लगन के साथ काम करने की जरुरत है । साथ ही जरुरत है, उस मार्ग और उस स्तर को पहचानने की जिसमें हम पारंगत हैं और जिन्हें हम आसानी से कर पायें ।।
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नारायण सभी का नित्य कल्याण करें । सभी सदा खुश एवं प्रशन्न रहें ।।
जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।
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भागवत प्रवक्ता- स्वामी धनञ्जय जी महाराज "श्रीवैष्णव" परम्परा को परम्परागत और निःस्वार्थ भाव से निरन्तर विस्तारित करने में लगे हैं। श्रीवेंकटेश स्वामी मन्दिर, दादरा एवं नगर हवेली (यूनियन टेरेटरी) सिलवासा में स्थायी रूप से रहते हैं। वैष्णव धर्म के विस्तारार्थ "स्वामी धनञ्जय प्रपन्न रामानुज वैष्णव दास" के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत जी की कथा का श्रवण करने हेतु संपर्क कर सकते हैं।।

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