सद्भाव से सबको वश में कर सकते हैं।।

0
148
Sadbhav Se Vash Me Kar sakate hai
Sadbhav Se Vash Me Kar sakate hai

सद्भाव से सबको वश में किया जा सकता है – शुक्र नीति।। Sadbhav Rakhana Chahiye – Shukra Neeti.

“सद्भावेन हरेन्मित्रं सद्भावेन च बान्धवान्।
स्त्रीभृत्यौ प्रेममानाभ्यां दाक्षिण्येनेतरं जनम्।।”
(शुक्रनीति–1.174)

अर्थः–सद्भाव से मित्रों के चित्त को वश में करे और सद्भाव से ही बान्धवों (परिवार के सदस्यों) को मुग्ध (प्रसन्न) रखे। स्त्री और भृत्य (नौकर) को प्रेम और मान (सत्कार, इज्जत) से प्रसन्न करे तथा अन्य लोगों को भी उदारता एवं चतुरता से अपने वशीभूत करें।।


यदि सभी अपने वश में हो जाएँ तो कोई भी कार्य कठिन होगा, सभी कार्य सरलता से हो जाएँगे और ऐसा करने वाला राजा अधिक दिनों तक राज्य कर सकता है। इतना ही नहीं उसका यश भी चारों दिशाओं में फैल जाएगा।।

इसके ऊपर भी इतिहास वह अच्छा राजा माना जा सकेगा। श्रीराम ऐसे ही राजा थे । सभी प्रजा अधिकारी उनके वश में थे, क्योंकि वे सबको मान-सम्मान और प्रतिष्ठा देते थे। सबसे प्रेमपूर्वक मिलते थे।।

आप वर्तमान राजनीति को देख लीजिए जो राजा अधिकारियों, नौकरों को तंग करता है, वह भी कभी सुख से नही रह सकता और राज्य भी सुरक्षित नहीं रह सकता। राज्य तो मुख्यतः अधिकारी ही चलाते हैं, अतः अधिकारी को कभी परेशान नहीं करना चाहिए।।

नौकर भी एक मनुष्य है और वह भी सम्मान की इच्छा रखता है, अतः उसका मान करें। स्त्री तो सदैव हमारी संस्कृति माननीया रही है, उसका मान तो सबसे अनिवार्य है।।

।। नारायण सभी का कल्याण करें ।।
 
 
जयतु संस्कृतम् जयतु भारतम् ।।
 
जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।
Previous articleNarad Neeti
Next articleअथ श्रीजगन्नाथ सहस्रनाम स्तोत्रम्।।
भागवत प्रवक्ता- स्वामी धनञ्जय जी महाराज "श्रीवैष्णव" परम्परा को परम्परागत और निःस्वार्थ भाव से निरन्तर विस्तारित करने में लगे हैं। श्रीवेंकटेश स्वामी मन्दिर, दादरा एवं नगर हवेली (यूनियन टेरेटरी) सिलवासा में स्थायी रूप से रहते हैं। वैष्णव धर्म के विस्तारार्थ "स्वामी धनञ्जय प्रपन्न रामानुज वैष्णव दास" के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत जी की कथा का श्रवण करने हेतु संपर्क कर सकते हैं।।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here