श्री त्रिदंडी देव सेवाश्रम संस्थान, सिलवासा।।

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Sevashram Sansthan
Sevashram Sansthan

श्री त्रिदंडी देव सेवाश्रम संस्थान, सिलवासा।। Sevashram Sansthan.

जय श्रीमन्नारायण, Swami Shri Dhananjay ji Maharaj.

मित्रों, ”श्री त्रिदंडी देव सेवाश्रम संस्थान” वैदिक ऋषियों के द्वारा निर्मित, वैदिक सनातन धर्म के सभी सूत्रों को, सही अर्थों में जन-जन को समझाने के प्रयत्न में, स्वामी श्री धनञ्जय जी महाराज एवं तिरुपति बालाजी मंदिर, सिलवासा के द्वारा निर्मित एक संस्था है। वैदिक सनातन धर्म के किसी भी पहलू में कोई खोट नहीं है। आप चाहे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें अथवा अन्य किसी भी दृष्टिकोण से। अगर आपको कहीं कोई खोट नजर आता है तो आप हमसे सम्पर्क करें। हम आपके संदेह कि निवृत्ति का पूर्ण प्रयत्न पूर्वक करेंगें।।

हमारे पूर्वज ऋषियों द्वारा व्यवस्थित हमारी सामाजिक एकता तथा वैदिक संस्कृति को न समझने के कारण, हमारी मानव सभ्यता के पहले ही कई खंड हो चुके हैं। और आज भी कुछ विकृत मानसिकता के लोग रूपया और सोहरत कमाने के लिए, पूरी ताकत लगाकर, हमारी इस बची हुई सनातन संस्कृति कि एकता को तोडने के लिए प्रयत्नरत हैं। प्रतिदिन नई-नई विचारधाराओं का जन्म होता है। और सभी अपने आप को ब्रह्मज्ञानी प्रमाणित करके आपको आकर्षित करना चाहते हैं।।

परन्तु मुझे लगता है, कि इसमें ऐसे लोगों का उद्देश्य केवल अपने उदर पोषण के लिए है। सच्चाई लेश मात्र भी नहीं है फिर चाहे वो कोई भी संस्था क्यों न हो। अगर कोई भी संस्था, वैदिक सनातन व्यवस्था से हटकर, आपको आत्मा-परमात्मा, ज्ञान-मुक्ति अथवा जन कल्याण कि बात करता है, तो आप इन्हें मदारी के अलावा और कुछ समझने कि भूल कदापि न करें। क्योंकि ये लोग मदारी के अलावा और कुछ नहीं हैं। और अगर हैं, तो हम इनको पाखंडी प्रमाणित करने को तैयार हैं।।

जी हाँ मैं ऐसे लोगों को चुनौती देता हूँ शास्त्रार्थ (डिबेट) के लिये। अगर इनमें लेश मात्र भी सच्चाई हैं, तो हमारी चुनौती को स्वीकार करें और अपने-आप को प्रमाणित करें। अन्यथा शास्त्रों कि आध्यात्मिक बातों का नाजायज फायदा उठाकर लोगों को ठगना बंद करें। वैदिक सनातन धर्म, जो विश्व कल्याण के लिए ही सदैव कार्य करता है। जिसके समस्त सूत्र ही विश्व कल्याणार्थ हैं। उन ब्राह्मणों को पाखंडी कह कर अपने आप को बहुत बड़ा योगी प्रमाणित करना बंद करें।।

शास्त्रों के आध्यात्मिक बातों का नाजायज फायदा उठाने वालों को हम कदापि नहीं छोडेंगें। आज भी हमारे यहाँ विद्वानों कि कमी नहीं है। हम उन्हें बतायेंगें, कि धर्म किसे कहा जाता है। और सच्चे मायने में धर्म का अर्थ क्या होता है? आप अगर जिज्ञासु हैं, तो हमारे साथ जुडिये, हम आपकी जिज्ञासा शांत करेंगें। आप अगर विद्वान हैं, तो हमारे सहयोग के लिए हमारे साथ जुडिये। अगर आपको धर्म के किसी भी पहलू पर कोई शंका है, अथवा आप विस्तृत रूप से समझना चाहते हैं, तो आप हमारे साथ जुडिये। आपके शंका का समाधान हमारे तरफ से करने का प्रयत्न किया जायेगा।।

आप अपने शहर में शंका समाधान अथवा प्रवचन सभा का आयोजन करवा सकते हैं। स्वामी जी आयेंगें और आप किसी भी तरह का प्रश्न पूछ सकते हैं। आप सभी से निवेदन है, कि सर्वप्रथम आप अपने धर्म (मानव धर्म अथवा वैदिक संस्कृति) को समझिए। फिर हमें सहयोग कीजिये क्योंकि आपका सहयोग अपेक्षित है। विधर्मियों से समस्त मानव समुदाय को बचाने हेतु। क्योंकि सृष्टि है, तो मानव समुदाय है और वैदिक संस्कृति है, तो सृष्टि है। अत: इस सृष्टि इस संसार अथवा सम्पूर्ण मानव समुदाय को बचाने हेतु, आपका सहयोग आवश्यक है।।

आवेदक एवं संचालक बालाजी वेद विद्यालय, तिरुपति बालाजी मंदिर सिलवासा।।

आप अपना अमूल्य सुझाव हमें अवश्य दें:-

स्वामी श्री धनञ्जय जी महाराज।।

आप सभी अपने मित्रों को फेसबुक पेज को लाइक करने और संत्संग से उनके विचारों को धर्म के प्रति श्रद्धावान बनाने का प्रयत्न अवश्य करें।।

नारायण सभी का नित्य कल्याण करें । सभी सदा खुश एवं प्रशन्न रहें ।।

जयतु संस्कृतम् जयतु भारतम्।।

।। नमों नारायण ।।

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भागवत प्रवक्ता- स्वामी धनञ्जय जी महाराज "श्रीवैष्णव" परम्परा को परम्परागत और निःस्वार्थ भाव से निरन्तर विस्तारित करने में लगे हैं। श्रीवेंकटेश स्वामी मन्दिर, दादरा एवं नगर हवेली (यूनियन टेरेटरी) सिलवासा में स्थायी रूप से रहते हैं। वैष्णव धर्म के विस्तारार्थ "स्वामी धनञ्जय प्रपन्न रामानुज वैष्णव दास" के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत जी की कथा का श्रवण करने हेतु संपर्क कर सकते हैं।।

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