Shukra Neeti

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Sadbhav Se Sabko Vash Me Karo
Sadbhav Se Sabko Vash Me Karo

शुक्र-नीति :–

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सफलता का रहस्य :-
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“चिरं संशृणुयान्नित्यं यजानीयात् क्षिप्रमेव च ।
विज्ञाय प्रभजेदर्थान्न कामं प्रभजेत् क्वचित् ।।”
(शुक्रनीति–3.57)

अर्थः- जो व्यक्ति बात को देर तक सुने और उसके तत्त्व (रहस्य) पर शीघ्र पहुँच जाए, किसी भी कार्य के रहस्य को समझकर उसमें हाथ डाले और किसी भी कामना के वश में न पडें (स्वार्थ में न पडे), वही व्यक्ति अपने कार्य के सिद्ध करने में सफल होता है ।।

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भागवत प्रवक्ता- स्वामी धनञ्जय जी महाराज "श्रीवैष्णव" परम्परा को परम्परागत और निःस्वार्थ भाव से निरन्तर विस्तारित करने में लगे हैं। श्रीवेंकटेश स्वामी मन्दिर, दादरा एवं नगर हवेली (यूनियन टेरेटरी) सिलवासा में स्थायी रूप से रहते हैं। वैष्णव धर्म के विस्तारार्थ "स्वामी धनञ्जय प्रपन्न रामानुज वैष्णव दास" के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत जी की कथा का श्रवण करने हेतु संपर्क कर सकते हैं।।

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