खुद का आँकलन भी खुद ही करें।।

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Swayam Ka Swayam Hi Ankalan Karen
Swayam Ka Swayam Hi Ankalan Karen

खुद के आँकलन का नजरिया भी खुद का ही होना चाहिये ।। Swayam Ka Swayam Hi Ankalan Karen.

जय श्रीमन्नारायण,

मित्रों, हम खुद को किस तरह देखें और खुद का मूल्यांकन किस तरह करें इसका विचार हमें अपने आसपास के लोगों से मिलता है ।।

लेकिन हम पूरी तरह प्रयत्न करने के बाद भी उनके विचारों के अनुरूप नहीं चल पाते हैं । और अगर चलें भी तो आप कभी पूरी तरह अपने मन का काम नहीं कर पाएंगे ।।

मित्रों, ऐसे में हमेशा दुसरे के विचारों के अनुरूप बने रहने का दबाव हम पर बना रहता है । इस स्थिति में इन्सान हमेशा खुद को कम आंकते रह जायेंगे ।।

इसलिए किसी की भी नकारात्मक प्रतिक्रिया या नकारात्मक विचार के आधार पर खुद के आकलन से बचना चाहिये ।।

इसलिये मेरा विचार है, कि दूसरों को सुनें लेकिन खुद के आँकलन का नजरिया भी खुद का ही हो तो इन्सान अपनी ऊर्जा को भी बचा पायेगा और सही दिशा में आगे भी बढ़ पायेंगे ।।

 नारायण सभी का नित्य कल्याण करें । सभी सदा खुश एवं प्रशन्न रहें ।।

जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।

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भागवत प्रवक्ता- स्वामी धनञ्जय जी महाराज "श्रीवैष्णव" परम्परा को परम्परागत और निःस्वार्थ भाव से निरन्तर विस्तारित करने में लगे हैं। श्रीवेंकटेश स्वामी मन्दिर, दादरा एवं नगर हवेली (यूनियन टेरेटरी) सिलवासा में स्थायी रूप से रहते हैं। वैष्णव धर्म के विस्तारार्थ "स्वामी धनञ्जय प्रपन्न रामानुज वैष्णव दास" के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत जी की कथा का श्रवण करने हेतु संपर्क कर सकते हैं।।

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