क्रोध का पूरा खानदान या विनाश का मार्ग।।

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the whole family of Krodh
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क्रोध का पूरा खानदान या विनाश का मार्ग।। the whole family of Krodh.

जय श्रीमन्नारायण,

मित्रों, क्या आपको पता है “क्रोध” के पूरे खानदान के बारे में? क्योंकि क्रोध एक ऐसा बेकार का शस्त्र है, जो सदैव विनाश ही करवाता है। इसलिए इसके सहायकों से बचें तो ये आपका जिंदगी बिगाड़ने नहीं आएगा।।

अगर क्रोध के परिवार अर्थात सहायकों के बारे में आपको पता नहीं है, तो कोई बात नहीं चलिये आज हम आपलोगों को “क्रोध” के पुरे खानदान के बारे में बताते हैं। इसका वर्णन स्वयं महर्षि शुकदेव ने राजा परीक्षित को भागवत कथा सुनाते हुये किया था। इसलिये इसके बारे में सभी को जानना आवश्यक है।।

स्वयं क्रोध का परिचय आपलोगों को देने की आवश्यकता तो मुझे नहीं लगता की है। इसलिये दोस्तों, क्रोध की एक लाडली बहन है, जिसका नाम “ज़िद” है। ईसका मतलब है, कि जो जिद्दी होगा उसे गुस्सा आएगा ही। और क्योंकि क्रोध कि लाड़ली बहन है न? इसलिए वो जहाँ रहेगी वहाँ क्रोध को आना ही पड़ेगा। इसलिए जिद्द को अपने से दूर ही रखना चाहिए।।

मित्रों, क्रोध की पत्नी का नाम है, “हिंसा”। इंसान को जब भी गुस्सा आता है, तो वो हिंसा करता ही है। क्योंकि पति कि अर्धांगिनी जो होती हैं पत्नियाँ। इसलिए पतिदेव कि सहायता हेतु उसे तो आना ही पड़ेगा ना?।।

दोस्तों, क्रोध का एक बडा भाई है जिसका नाम “अंहकार” है। भाई अर्थात एक भाई गलती भी करे तो दूसरे को मजबूरी में ही सही सहायता के लिए तो आना ही पड़ता है। ऐसे में अहंकार जहाँ होगा वहाँ क्रोध अर्थात विनाश आएगा ही।।

क्रोध का बाप जिससे वह डरता है उसका नाम है – “भय”। मेरे विचारों में भय तो सभी को एक दूसरे से होना चाहिए। क्योंकि इस संसार में कौन क्या कर सकता है? यह कोई नहीं जानता। कोई आपका अन्याय क्यों सहे?।।

क्योंकि “मरता क्या नहीं करता” इस कहावत के अनुसार कोई भी आपका धौंस बर्दास्त क्यों करे। इसलिये किसी को कमजोर समझकर उसे डराने अथवा धमकाने का प्रयत्न नहीं करना चाहिए। बल्कि भय को अपने क्रोध का नियंत्रक हथियार बनाकर प्रयोग करना चाहिए।।

क्रोध की दो बेटियाँ हैं जिनका नाम “निंदा और चुगली” है। जो लोग दूसरे कि निन्दा और चुगली करते हैं। ऐसे में बदले में दूसरा भी उनकी निन्दा या किसी से चुगली कर दे तो फिर बेटियों के हितार्थ क्रोध को आना ही पड़ता है। जहाँ से विनाश लीला का आरम्भ हो जाता है।।

मित्रों, इस क्रोध का एक बेटा है जिसका नाम – “बैर” है। अकारण किसी से भी किसी भी प्रकार से बैर नहीं करना चाहिये। क्योंकि किसी को भी अपना पुत्र अति प्यारा होता है। और स्वाभाविक है, कि आपने बैर मोल लिया और आपके शान्त जीवन में क्रोध का पदार्पण हुआ।।

इस क्रोध के खानदान में एक नकचढ़ी बहू है जिसे “ईर्ष्या” कहते हैं। अतः आपने भूलकर भी किसी से ईर्ष्या करना आरम्भ किया तो फिर घर के मर्यादा की रक्षा हेतु पति और श्वसुर दोनों आ जाते हैं। अर्थात ईर्ष्या से बैर और बैर से क्रोध और फिर क्रोध से विनाश।।

मित्रों, क्रोध की एक पोती भी है जिसका नाम “घृणा” है। किसी से भी अगर हम घृणा करते हैं तो फिर क्रोध के पूरे खानदान का आपके जीवन में आगमन हो जाता है। क्योंकि पूरे परिवार की दुलारी जो है। ऐसे में किसी से भी घृणा नहीं करनी चाहिये। हमारे ऋषियों ने सम्पूर्ण सृष्टि में ही ईश्वर का वास बताया है।।

क्रोध की मां का नाम है “उपेक्षा” है। रहिमन देखि बडेन को लघु न दिजै डारि। जहाँ काम आवै सुई कहा करे तरवारि।। इसलिये किसी की भी उपेक्षा भूलकर भी नहीं करनी चाहिये। क्योंकि आप जिसकी उपेक्षा करेंगे और जरूरत पड़ने पर जब आप उसकी सहायता हेतु उसके पास जाएंगे और वो भी अगर आपकी उपेक्षा कर देगा तब आपको क्रोध आएगा और फिर होगी विनाश लीला।।

इस क्रोध के दादा का नाम “द्वेष” है। जैसा की आपको पता है, की जब आप किसी से द्वेष करते हैं तो उसको देखते ही आपको गुस्सा आने लगता है। और गीता कहती है, कि “क्रोधाद्भवती संमोहः संमोहात्स्मृतिविभ्रमः। स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति।।

अर्थात – क्रोध से अत्यन्त मूढ़भाव (मूर्खता) उत्पन्न होता है, मूढ़भाव से स्मृति में भ्रम होता है। स्मृति में भ्रम होने से बुद्धि अर्थात् ज्ञानशक्ति का नाश हो जाता है और फिर बुद्धि का नाश हो जाने से पुरुष का सदा के लिए विनाश हो जाता है।।

मित्रों, इसीलिए आप सभी से मेरा एक निवेदन है, कि इस खानदान से सदैव दूर रहें। क्योंकि हमेशा खुश रहने का इससे दूसरा कोई उपाय नहीं है। साथ ही इस ज्ञानयुक्त लेख को आगे अपने सभी सुहृद जनों को भी भेजें और सभी को इस खानदान के बारे में जानकारी दें।।

।। सदा सत्संग करें । सदाचारी और शाकाहारी बनें । सभी जीवों की रक्षा करें ।।

नारायण सभी का नित्य कल्याण करें । सभी सदा खुश एवं प्रशन्न रहें ।।

जयतु संस्कृतम् जयतु भारतम्।।

।। नमों नारायण ।।

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