हमारी युवा पीढ़ी और आज का फैशन।।

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yuva Pidhi and fashion
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हमारी युवा पीढ़ी और आज का फैशन।। yuva Pidhi and fashion.

जय श्रीमन्नारायण, Today’s fashion and the younger generation.

मित्रों, शास्त्रों में लिखा है, कि व्यक्ति को अपने सौंदर्य को बढ़ाना चाहिए। मैं कहता हूँ, कि आप खूबसूरत दिखें, लेकिन सात्विक अलंकारों से। कदापि ऐसी कॉस्मेटिक्स का सहारा न लें, कि उसे हटाने के बाद आपका वास्तविक स्वरुप पिशाचों सा बन जाय। हाँ आप हमारे वैदिक सनातन पद्धति जिसमें योगा एवं हर्बल सामग्रियाँ हैं उसका उपयोग कर सकते हैं।।yuva Pidhi and fashion

लेकिन आज तो इसे ही फैशन माना जा रहा है। और इस तरह के रूप को ही, सर्वोत्तम समझकर हमारी आज कि पीढ़ी इन्हीं के पीछे भागती है। और इन्हें ही अपना आदर्श समझती है। भागवत जी में लिखा है, राजा युधिष्ठिर ने जब सभी कुछ त्यागकर सन्यास लिया, तब उन्होंने ऐसा किया-

चीरवासा निराहारो बद्धवाङ्मुक्तमूर्धजः।।
दर्शयन्नात्मनो रूपं जडोन्मत्तपिशाचवत्।।स्क-१.अ-१५.श्लो43.

yuva Pidhi and fashionअर्थ:- इसके पश्चात उन्होंने शरीर पर चीर-वस्त्र धारण कर लिया। अन्न-जल का त्याग कर दिया, मौन व्रत ले लिया और केश खोलकर बिखेर लिये। वे अपने रूप को ऐसा दिखाने लगे जैसे कोई जड़, उन्मत्त या पिशाच हो।।43।।

लेकिन आज तो लोग, फटे जीन्स (चीर-वस्त्र) पहनते हैं। वडा-पाव, पीजा (अन्न-जल के परित्यागी) आदि खाते हैं। जैकपाट लगाकर कान में म्यूजिक सुनते रहते हैं। मोबाइल में गेम अथवा इन्टरनेट पर लगे रहकर मौन व्रत धारण किये रहते हैं।।

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और बालों का तो क्या कहना साहब। मर्द तो मर्द रहे नहीं (औरतों से दिखने लगे) साथ ही शक्ति स्वरूपा माताएं भी अपने सर्व श्रृंगाराभूषण केशों को कटवाकर, पिशाचों जैसी दिखने का प्रयत्न जन्मना ही करती है।।

बातें, चाहे स्त्री की हो या पुरुष की, बालक की हो या वृद्ध की। सब बातों से तो आत्मज्ञानी ही नजर आते हैं। तो कहीं न कहीं, पहले के लोगों कि अपेक्षा आज के लोग जन्मना सिद्ध दिखने का प्रयत्न करते हैं।।

और कही न कहीं यही हमारी संस्कृति के पतन का कारण बनता जा रहा है। हमारा आपसे निवेदन है, कि आप बचें और अपनों को इस प्रकार कि हरकतों से बचाने का प्रयत्न करें। अपनी संस्कृति को अपनायें तथा अपने बच्चों को उसका ज्ञान देने का प्रयत्न करें तभी कुछ हो सकता हैं।।

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आप सभी अपने मित्रों को फेसबुक पेज को लाइक करने और संत्संग से उनके विचारों को धर्म के प्रति श्रद्धावान बनाने का प्रयत्न अवश्य करें।।

नारायण सभी का नित्य कल्याण करें । सभी सदा खुश एवं प्रशन्न रहें ।।

जयतु संस्कृतम् जयतु भारतम्।।

।। नमों नारायण ।।

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