HomeArticlesKrishna Prem Ki Shayariyanभक्ति का आलोक।। Bhakti Ka Alok

भक्ति का आलोक।। Bhakti Ka Alok

भक्ति का आलोक।। Bhakti Ka Alok.

भूमिका:- भक्ति वह दिव्य धारा है, जो मनुष्य के अंतःकरण को शुद्ध, शांत और प्रकाशित कर देती है। श्रीकृष्ण-भक्ति में डूबा हृदय संसार के दुःखों से ऊपर उठकर परम शांति का अनुभव करता है। इस रचना में उसी भक्ति-प्रकाश का मधुर चित्रण प्रस्तुत है। श्रीकृष्ण-भक्ति, शरणागति और आत्मिक आलोक पर आधारित यह संस्कृतनिष्ठ हिंदी शायरी पाठकों को गहन श्रद्धा से भर देता है।।

शायरी:-

Bhakti Ka Alok

जब भक्ति का रंग चढ़ जाए, तब जग सूना-सा लगता है।।
कृष्ण-नाम की महिमा से ही, हर अंतर आलोकित रहता है।।

तेरे श्रीचरणों में जो झुकता, उसका मन निर्मल हो जाता।।
कान्हा का अनुग्रह पाकर वह, प्रेम-सिंधु में खो जाता।।

हर संकट में तू ही सहारा, हर वेदना का तू उपशमन।।
कृष्ण-नाम के आश्रय से ही, मिलता जीवन को नव-जीवन।।
Bhakti Ka Alok
मेरे अंतर के मन्दिर में, बस तेरी ही प्रतिमा रहे।।
जब तक श्वास प्रवाहित हो, तेरी ही भक्ति-धारा बहे।।

जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।
Swami Ji Maharaj
Swami Ji Maharajhttp://sansthanam.com
''स्वामी धनञ्जय महाराज'' जो वैदिक आध्यात्मिक वाङ्गमयी व्यास परम्परा कि विलक्षण तथा रसमयी वाग्धारा को प्रवाहित करने वाले परम संत हैं । जो हास्यात्मक एवं कवित्व कला से परिपूर्ण भागवत कथा के माध्यम से भक्तों के मन को अनायास ही भगवान श्री मुरली मनोहर कृष्ण के श्री चरणों में लगा देते हैं ।। स्वामी जी हिन्दी, गुजराती, अवधी एवं भोजपुरी में सरस भागवत कथा एवं श्री राम कथा कहते हैं । बदले में दक्षिणा की कोई मांग नहीं रखते जो मिल जाय उसी से संतुष्ट रहते हैं ।। स्वामी जी को ''वेंकटेश स्वामी का मंदिर'' सिलवासा (संघ शासित प्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली) में भगवत्कृपा से सेवा का अवसर मिला । पूरी निष्ठा से भगवान की सेवा की । भगवत्कृपा से आज भी वहीँ रहकर भगवान की सेवा करते हुए भागवत जी की कथा का देश-विदेशों में रसमय गायन करते हैं तथा भगवद्भक्ति (भगवान के श्री चरणों) में अपना जीवन समर्पित कर आनन्द का अनुभव करते हैं ।।
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