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गोकुल का उजियारा।।

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Gokul Ka Ujiyara
Gokul Ka Ujiyara

गोकुल का उजियारा।। Gokul Ka Ujiyara.

भूमिका:- गोकुल श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं और दिव्य मुस्कान से आलोकित वह पावन भूमि है, जहाँ प्रेम, सरलता और माधुर्य का अद्भुत संगम दिखाई देता है। इस रचना में गोकुल की उसी दिव्यता का स्मरण है। गोकुल, बालकृष्ण और उनकी दिव्य लीलाओं पर आधारित यह शायरी-लेख भक्तिभाव, माधुर्य और आनंद से परिपूर्ण है।।

शायरी:-

गोकुल का हर कण-पल आज भी, कृष्ण-स्मृति से महकता है।।
वहाँ का वायु-प्रवाह भी, मानो मधुर गीत सा बहता है।।

बाल-गोपाल की हँसी में ही, सारा जगत समाया है।।
उनकी नटखट लीला ने ही, भक्तों का मन हरषाया है।।

गोकुल की पावन धरती पर, प्रेम स्वयं अवतरित हुआ।।
वहाँ का हर एक वृक्ष-वल्लरी, भक्ति-रस से आप्लुत हुआ।।

Gokul Ka Ujiyara

जिसने गोकुल का स्मरण किया, उसका अंतःकरण खिल जाता।।
श्रीकृष्ण के बाल-रूप का दर्शन, मन को नित पुलकाता।।

कभी तो आ भी जाओ प्रियतम ! क्योंकि प्यारे ! आपके बिना हमारा कोई आस्तित्व ही नहीं बचता ।।

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जय जय श्री राधे ।।
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Swami Ji Maharaj
''स्वामी धनञ्जय महाराज'' जो वैदिक आध्यात्मिक वाङ्गमयी व्यास परम्परा कि विलक्षण तथा रसमयी वाग्धारा को प्रवाहित करने वाले परम संत हैं । जो हास्यात्मक एवं कवित्व कला से परिपूर्ण भागवत कथा के माध्यम से भक्तों के मन को अनायास ही भगवान श्री मुरली मनोहर कृष्ण के श्री चरणों में लगा देते हैं ।। स्वामी जी हिन्दी, गुजराती, अवधी एवं भोजपुरी में सरस भागवत कथा एवं श्री राम कथा कहते हैं । बदले में दक्षिणा की कोई मांग नहीं रखते जो मिल जाय उसी से संतुष्ट रहते हैं ।। स्वामी जी को ''वेंकटेश स्वामी का मंदिर'' सिलवासा (संघ शासित प्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली) में भगवत्कृपा से सेवा का अवसर मिला । पूरी निष्ठा से भगवान की सेवा की । भगवत्कृपा से आज भी वहीँ रहकर भगवान की सेवा करते हुए भागवत जी की कथा का देश-विदेशों में रसमय गायन करते हैं तथा भगवद्भक्ति (भगवान के श्री चरणों) में अपना जीवन समर्पित कर आनन्द का अनुभव करते हैं ।।

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