HomeArticlesKrishna Prem Ki Shayariyanराधा-कृष्ण का अनंत प्रेम।।

राधा-कृष्ण का अनंत प्रेम।।

राधा-कृष्ण का अनंत प्रेम।। Radha Krishna Ka Anant Prem

भूमिका:- राधा और श्रीकृष्ण का प्रेम लौकिक सीमाओं से परे, आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। यह प्रेम त्याग, समर्पण और निर्मल अनुराग का ऐसा उदाहरण है, जिसकी तुलना किसी अन्य संबंध से नहीं की जा सकती। इस शायरी में उसी दिव्य प्रेम-तत्त्व का आलोक है। राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम पर आधारित यह संस्कृतनिष्ठ हिंदी शायरी-लेख भक्ति, अनुराग और आत्मिक सौंदर्य से भरपूर है।।

शायरी:-

Radha Krishna Ka Anant Prem
राधा के प्रेम में समाहित, श्रीकृष्ण का अनुपम रूप रहा।

प्रेम का जो परम सुगंधित नाम, उन्हीं दोनों में पूर्ण हुआ।।

न धन चाहिए, न वैभव, न संसारिक सम्मान हमें।
बस राधा-कृष्ण का नाम रहे, जीवन के हर स्थान हमें।।

जिसने राधा के प्रेम को जाना, कृष्ण निकट उसके आए।
अंतस के तमस-आवरण में वे, उज्ज्वल दीपक-से छाए।।
Radha Krishna Ka Anant Prem
सच्चा यदि प्रेम हृदय में हो, तो कृष्ण अवश्य मिल जाते।
भाव-भरे उस पवित्र मन को, वे कभी नहीं ठुकराते।।

 

जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।
Swami Ji Maharaj
Swami Ji Maharajhttp://sansthanam.com
''स्वामी धनञ्जय महाराज'' जो वैदिक आध्यात्मिक वाङ्गमयी व्यास परम्परा कि विलक्षण तथा रसमयी वाग्धारा को प्रवाहित करने वाले परम संत हैं । जो हास्यात्मक एवं कवित्व कला से परिपूर्ण भागवत कथा के माध्यम से भक्तों के मन को अनायास ही भगवान श्री मुरली मनोहर कृष्ण के श्री चरणों में लगा देते हैं ।। स्वामी जी हिन्दी, गुजराती, अवधी एवं भोजपुरी में सरस भागवत कथा एवं श्री राम कथा कहते हैं । बदले में दक्षिणा की कोई मांग नहीं रखते जो मिल जाय उसी से संतुष्ट रहते हैं ।। स्वामी जी को ''वेंकटेश स्वामी का मंदिर'' सिलवासा (संघ शासित प्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली) में भगवत्कृपा से सेवा का अवसर मिला । पूरी निष्ठा से भगवान की सेवा की । भगवत्कृपा से आज भी वहीँ रहकर भगवान की सेवा करते हुए भागवत जी की कथा का देश-विदेशों में रसमय गायन करते हैं तथा भगवद्भक्ति (भगवान के श्री चरणों) में अपना जीवन समर्पित कर आनन्द का अनुभव करते हैं ।।
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