HomeArticlesKrishna Prem Ki Shayariyanद्रौपदी का एक धागा।।

द्रौपदी का एक धागा।।

1.द्रौपदी का एक धागा।। Dropadi ka Ek Dhaga.

जब कृष्ण की उँगली कटी थी, द्रौपदी ने अपनी साड़ी फाड़कर पट्टी बाँधी थी — बिना सोचे, बिना गिने।।

वर्षों बाद, जब उसकी साड़ी खींची गई, कृष्ण ने वो एक धागा अनंत बना दिया।।

प्रेम का हिसाब ऐसे ही होता है। तुम एक धागा दो, वो तुम्हें आकाश दे देता है। तुम एक आँसू गिराओ, वो तुम्हें सागर दे देता है।।

बस — देने में कंजूसी मत करना।।

2.अंतिम बाँसुरी।। Antim Basuri.

Dropadi ka Ek Dhaga

कहते हैं जब कृष्ण वृंदावन छोड़कर गए, उन्होंने बाँसुरी वहीं छोड़ दी। फिर कभी नहीं बजाई।।

क्यों? क्योंकि वो बाँसुरी वृंदावन की थी — उन गलियों की, उन आँखों की, उस प्रेम की। वो संगीत द्वारका के महलों में नहीं गूँज सकता था।।

कुछ प्रेम ऐसे होते हैं — जो एक ही जगह खिलते हैं, एक ही समय में जीते हैं। उन्हें पकड़ने की कोशिश मत करो। उन्हें जी लो — पूरी तरह, एक ही बार।।

फिर वो तुम्हारे भीतर हमेशा बजते रहेंगे।।

 

जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।
Swami Ji Maharaj
Swami Ji Maharajhttp://sansthanam.com
''स्वामी धनञ्जय महाराज'' जो वैदिक आध्यात्मिक वाङ्गमयी व्यास परम्परा कि विलक्षण तथा रसमयी वाग्धारा को प्रवाहित करने वाले परम संत हैं । जो हास्यात्मक एवं कवित्व कला से परिपूर्ण भागवत कथा के माध्यम से भक्तों के मन को अनायास ही भगवान श्री मुरली मनोहर कृष्ण के श्री चरणों में लगा देते हैं ।। स्वामी जी हिन्दी, गुजराती, अवधी एवं भोजपुरी में सरस भागवत कथा एवं श्री राम कथा कहते हैं । बदले में दक्षिणा की कोई मांग नहीं रखते जो मिल जाय उसी से संतुष्ट रहते हैं ।। स्वामी जी को ''वेंकटेश स्वामी का मंदिर'' सिलवासा (संघ शासित प्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली) में भगवत्कृपा से सेवा का अवसर मिला । पूरी निष्ठा से भगवान की सेवा की । भगवत्कृपा से आज भी वहीँ रहकर भगवान की सेवा करते हुए भागवत जी की कथा का देश-विदेशों में रसमय गायन करते हैं तथा भगवद्भक्ति (भगवान के श्री चरणों) में अपना जीवन समर्पित कर आनन्द का अनुभव करते हैं ।।
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