1.सुदामा के चावल।। Sudama Ke Chaval.
सुदामा ने मुट्ठी भर चावल दिए — फटे कपड़ों में, झिझकते हाथों से। कृष्ण ने वो चावल ऐसे खाए जैसे अमृत हो।।
प्रेम में मात्रा नहीं देखी जाती — भाव देखा जाता है। अर्जुन ने रथ दिए, द्रौपदी ने वस्त्र दिए, पर सुदामा के चावलों की बात आज भी होती है।।
क्योंकि वो चावल नहीं थे — वो समर्पण था। और कृष्ण समर्पण के भूखे हैं, भोग के नहीं।।
2.गीता का पहला शब्द।। Geeta Ka Pahala Shabd.

गीता का पहला शब्द है — “धर्मक्षेत्रे”। अंतिम शब्द है — “मम”।।
बीच में सब कुछ है — ज्ञान, कर्म, भक्ति, योग। पर शुरुआत और अंत? धर्म और ‘मेरा’।।
कृष्ण कहते हैं: जो धर्म के क्षेत्र में खड़ा है, वो मेरा है। तुम युद्ध करो या न करो, तुम जीतो या हारो — पर धर्म पर खड़े रहो। वहीं मैं मिलूँगा।।
कभी तो आ भी जाओ प्रियतम ! क्योंकि प्यारे ! आपके बिना हमारा कोई आस्तित्व ही नहीं बचता ।।
जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।



