Home Articles Krishna Prem Ki Shayariyan सुदामा के चावल।।

सुदामा के चावल।।

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Sudama Ke Chaval
Sudama Ke Chaval

1.सुदामा के चावल।। Sudama Ke Chaval.

सुदामा ने मुट्ठी भर चावल दिए — फटे कपड़ों में, झिझकते हाथों से। कृष्ण ने वो चावल ऐसे खाए जैसे अमृत हो।।

प्रेम में मात्रा नहीं देखी जाती — भाव देखा जाता है। अर्जुन ने रथ दिए, द्रौपदी ने वस्त्र दिए, पर सुदामा के चावलों की बात आज भी होती है।।

क्योंकि वो चावल नहीं थे — वो समर्पण था। और कृष्ण समर्पण के भूखे हैं, भोग के नहीं।।

2.गीता का पहला शब्द।। Geeta Ka Pahala Shabd.

Sudama Ke Chaval

गीता का पहला शब्द है — “धर्मक्षेत्रे”। अंतिम शब्द है — “मम”।।

बीच में सब कुछ है — ज्ञान, कर्म, भक्ति, योग। पर शुरुआत और अंत? धर्म और ‘मेरा’।।

कृष्ण कहते हैं: जो धर्म के क्षेत्र में खड़ा है, वो मेरा है। तुम युद्ध करो या न करो, तुम जीतो या हारो — पर धर्म पर खड़े रहो। वहीं मैं मिलूँगा।।

कभी तो आ भी जाओ प्रियतम ! क्योंकि प्यारे ! आपके बिना हमारा कोई आस्तित्व ही नहीं बचता ।।

 

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जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।

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