कामिका एकादशी व्रत कथा एवं विधि।।

0
368
Kamika Ekadashi Vrat
Kamika Ekadashi Vrat

कामिका एकादशी व्रत कथा एवं विधि सहित हिन्दी में।। Kamika Ekadashi Vrat Vidhi And Katha in Hindi.

जय श्रीमन्नारायण,

मित्रों, श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को कामिका एकादशी (Kamika Ekadashi) कहते हैं। मान्यता है, कि कामिका एकादशी का व्रत करने और भगवान विष्‍णु की पूजा करने से समस्त पापों का नाश होता है और सभी बिगड़े काम बनने लगते हैं। यही नहीं इस व्रत को करने वालो के पितरों के कष्ट भी दूर हो जाते हैं। कामिका एकादशी व्रत में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और कथा सुनी जाती है।।

कामिका एकादशी की कथा सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल प्राप्त होता है। हमारे वैदिक परंपरा में एकादशी को पुण्य कार्यों के लिए, भक्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। वैसे तो एक वर्ष में 24 एकादशी होती हैं लेकिन मलमास या अधिकमास होने पर इनकी संख्या 26 हो जाती है। पुराणों के अनुसार कामिका एकादशी का व्रत रखने से जीवात्माओं को उनके सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।।

Kamika Ekadashi 2020, Kamika Ekadashi Vrat, Kamika Ekadashi.

कामिका एकादशी को विष्णु भगवान की अराधना एवं पूजा का सर्वश्रेष्ठ फल होता है। इस व्रत के पुण्य से जीवात्मा को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। इस एकादशी का व्रत करने से जीव के समस्त कष्टों का निवारण हो जाता है एवं मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।।

कामिका एकादशी व्रत कथा।। Kamika Ekadashi Vrat Katha.

प्राचीन काल में किसी गांव में एक ठाकुर जी थे। क्रोधी ठाकुर का एक ब्राह्मण से झगडा हो गया और क्रोध में आकर ठाकुर से ब्राह्मण का खून हो जाता है। अत: अपने अपराध की क्षमा याचना हेतु ब्राहमण की क्रिया उसने करनी चाही।।

परन्तु पंडितों ने उसकी क्रिया में शामिल होने से मना कर दिया और वह ब्रहम हत्या का दोषी बन गया। परिणाम स्वरुप ब्राह्मणों ने भोजन करने से इंकार कर दिया। तब उन्होने एक मुनि से निवेदन किया कि हे भगवान, मेरा पाप कैसे दूर हो सकता है।।

इस पर मुनि ने उसे कामिका एकाद्शी व्रत करने की प्रेरणा दी। ठाकुर ने वैसा ही किया जैसा मुनि ने उसे करने को कहा था। जब रात्रि में भगवान की मूर्ति के पास जब वह शयन कर रहा था। तभी उसे स्वपन में प्रभु दर्शन देते हैं और उसके पापों को दूर करके उसे क्षमा दान देते हैं।।

कामिका एकादशी पूजा-विधि।। Kamika Ekadashi Puja Vidhi.

एकादशी के दिन स्नानादि से पवित्र होने के पश्चात संकल्प करके भगवान श्री विष्णु के विग्रह की पूजन करना चाहिए। भगवान विष्णु को फूल, फल, तिल, दूध, पंचामृत आदि नाना पदार्थ निवेदित करके, आठों प्रहर निर्जल रहकर विष्णु जी के नाम का स्मरण एवं कीर्तन करना चाहिए।।

एकादशी व्रत में ब्राह्मण भोजन एवं दक्षिणा का बड़ा ही महत्व है। अत: ब्राह्मण को भोजन करवाकर दक्षिणा सहित विदा करने के पश्चात ही द्वादशी को भोजन ग्रहण करना चाहिये। इस प्रकार जो कामिका एकादशी का व्रत रखता है उसकी सम्पूर्ण मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।।

कामिका एकादशी व्रत माहात्म्य।। Kamika Ekadashi Vrat Mahatmya (Importance).

एक बार कुन्तीपुत्र धर्मराज युधिष्ठिर भगवान कृष्ण से कहने लगे, कि हे भगवन! आषाढ़ शुक्ल देवशयनी एकादशी तथा चातुर्मास्य माहात्म्य मैंने भली प्रकार से सुना। अब कृपा करके श्रावण कृष्ण एकादशी का क्या नाम है, सो बताइए।।

भगवान श्रीकृष्ण कहने लगे कि हे युधिष्ठिर! इस एकादशी की कथा एक समय स्वयं ब्रह्माजी ने देवर्षि नारद से कही थी, वही मैं तुमसे कहता हूँ। नारदजी ने ब्रह्माजी से पूछा था कि हे पितामह! श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनने की मेरी इच्छा है, उसका क्या नाम है?।।

साथ ही इस व्रत कि क्या विधि है और उसका माहात्म्य क्या है, सो कृपा करके कहिए। नारदजी के ये वचन सुनकर ब्रह्माजी ने कहा- हे नारद! लोकों के हित के लिए तुमने बहुत सुंदर प्रश्न किया है।।

श्रावण मास के कृष्ण पक्ष कि एकादशी का नाम कामिका है। उसके सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। इस दिन शंख, चक्र, गदाधारी विष्णु भगवान का पूजन किया जाता है, जिनके नाम श्रीधर, श्रीहरि, विष्णु, माधव, मधुसूदन हैं। उनकी पूजा करने से जो फल मिलता है सो सुनो।।

जो फल गंगा, काशी, नैमिषारण्य और पुष्कर स्नान से मिलता है, आज के दिन भगवान विष्णु के पूजन से वह सब फल सहज ही मिल जाता है। जो फल सूर्य एवं चंद्र ग्रहण पर कुरुक्षेत्र और काशी में स्नान करने, समुद्र, वन सहित पृथ्वी दान करने से, सिंह राशि के बृहस्पति में गोदावरी और गंडकी नदी में स्नान से भी प्राप्त नहीं होता वह समस्त फल आज भगवान विष्णु के पूजन से मिल जाता है।।

जो मनुष्य श्रावण में भगवान का पूजन करते हैं, उनसे देवता, गंधर्व और सूर्य आदि सब पूजित हो जाते हैं। अत: पापों से डरने वाले मनुष्यों को कामिका एकादशी का व्रत और विष्णु भगवान का पूजन आज अवश्य ही करना चाहिए।।

पापरूपी कीचड़ में फँसे हुए और संसाररूपी समुद्र में डूबे मनुष्यों के लिए इस एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु का पूजन अत्यंत आवश्यक है। इससे बढ़कर पापों के नाश का कोई उपाय नहीं है।।

हे नारद! स्वयं भगवान ने यही कहा है, कि कामिका व्रत से जीव कुयोनि को प्राप्त नहीं होता। जो मनुष्य इस एकादशी के दिन भक्तिपूर्वक तुलसी दल भगवान विष्णु को अर्पण करते हैं, वे इस संसार के समस्त पापों के फल से वंचित हो जाते हैं।।

विष्णु भगवान रत्न, मोती, मणि तथा आभूषण आदि से इतने प्रसन्न नहीं होते जितने तुलसी दल से। तुलसी दल पूजन का फल चार भार चाँदी और एक भार स्वर्ण के दान के बराबर होता है।।

हे नारद! मैं स्वयं भगवान की अतिप्रिय तुलसी को सदैव नमस्कार करता हूँ। तुलसी के पौधे को सींचने से मनुष्य की सब यातनाएँ नष्ट हो जाती हैं। दर्शन मात्र से सब पाप नष्ट हो जाते हैं और स्पर्श से मनुष्य पवित्र हो जाता है।।

कामिका एकादशी की रात्रि को दीपदान तथा जागरण के फल का माहात्म्य चित्रगुप्त भी नहीं कह सकते। जो इस एकादशी की रात्रि को भगवान के मंदिर में दीपक जलाते हैं उनके पितर स्वर्गलोक में अमृतपान करते हैं तथा जो घी या तेल का दीपक जलाते हैं, वे सौ करोड़ दीपकों से प्रकाशित होकर सूर्य लोक को जाते हैं।।

ब्रह्माजी कहते हैं, कि हे नारद! ब्रह्महत्या तथा भ्रूण हत्या आदि पापों को नष्ट करने वाली इस कामिका एकादशी का व्रत मनुष्य को यत्न के साथ करना चाहिए। कामिका एकादशी के व्रत का माहात्म्य श्रद्धा से सुनने और पढ़ने वाला मनुष्य सभी पापों से मुक्त होकर विष्णु लोक को जाता है।।

हे नारदजी! स्वयं भगवान ने अपने मुख से कहा है, कि मनुष्यों को अध्यात्म विद्या से जो फल प्राप्त होता है, उससे अधिक फल कामिका एकादशी का व्रत करने से मिल जाता है। इस उपवास के करने से मनुष्य को न यमराज के दर्शन होते हैं और न ही नरक के कष्ट भोगने पड़ते हैं। वह स्वर्ग का अधिकारी बन जाता है।।

कामिका एकादशी के दिन क्या ना करें?।। Kamika Ekadashi Ko Kya Na Kare.

इस एकादशी का व्रत रखनेवालों को सदाचार का पालन करना चाहिए। जो यह व्रत नहीं भी करता है उन्हें भी इस दिन लहसुन, प्याज, बैंगन, मांस-मदिरा, पान-सुपारी और तंबाकू आदि से परहेज करना चाहिए।।

व्रत रखनेवाले को दशमी तिथि के दिन से ही भगवान विष्णु का ध्यान शुरू कर देना चाहिए। साथ ही काम भाव, भोग विलास से खुद को दूर कर लेना चाहिए। ध्यान रहे व्रत के दौरान कांसे के बर्तन में भोजन और नमक का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए।।

।। सदा सत्संग करें । सदाचारी और शाकाहारी बनें । सभी जीवों की रक्षा करें ।।

नारायण सभी का नित्य कल्याण करें । सभी सदा खुश एवं प्रशन्न रहें ।।

जयतु संस्कृतम् जयतु भारतम्।।

।। नमों नारायण ।।

Previous articleदेवशयनी एकादशी व्रत कथा एवं विधि।।
Next articleशास्त्रज्ञान से बड़ा कुछ भी नहीं।।
भागवत प्रवक्ता- स्वामी धनञ्जय जी महाराज "श्रीवैष्णव" परम्परा को परम्परागत और निःस्वार्थ भाव से निरन्तर विस्तारित करने में लगे हैं। श्रीवेंकटेश स्वामी मन्दिर, दादरा एवं नगर हवेली (यूनियन टेरेटरी) सिलवासा में स्थायी रूप से रहते हैं। वैष्णव धर्म के विस्तारार्थ "स्वामी धनञ्जय प्रपन्न रामानुज वैष्णव दास" के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत जी की कथा का श्रवण करने हेतु संपर्क कर सकते हैं।।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here