Home Articles Bhajans मोहन क्या अपराध हमारा जो इतना तुम सताते हो।।

मोहन क्या अपराध हमारा जो इतना तुम सताते हो।।

0
27
Mohan Kyo Tum Satate Ho
Mohan Kyo Tum Satate Ho

मोहन क्या अपराध हमारा जो इतना तुम सताते हो।। Mohan Kyo Tum Satate Ho.

जय श्रीमन्नारायण,

प्यारे कन्हैया,

मोहन क्या अपराध हमारा जो इतना तुम सताते हो
अपनी इक झलक के लिए जन्मो से हमे तड़पाते हो

बंसी की मधुर धुन से रागिनियों को बजाते हो
अपनी बंसी की धुन बजा हमे पागल बनाते हो
बंसी को भी तुम अधरामृत पिलाते हो

… …उसे होंठो से छूकर उसे धन्य बनाते हो
और हमको तुम चरणों से भी क्यों दूर बिठाते हो

हमारा दिल छीन कर क्यों यूँ मुस्कराते हो
हमारे सजल नेत्रों से अश्रु जल गिराते हो

मोहन मेरे मन में समा जाओ
मोहे ना इतना सताओ..

क्योंकि प्यारे आपके बिना हमारा कोई आस्तित्व ही नहीं बचता ।।

Sansthanam:    Swami Ji:   Swami Ji Blog:    Sansthanam Blog:    facebook Page:

 

जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।

Previous articleबंसी वाले के चरणों में सर हो मेरा।। Bansi Wale Ke Charanon Me
Next articleउसकी किस्मत में मेरी भी जान लिख दे।। Meri Bhi Jaan Likh De
Swami Ji Maharaj
''स्वामी धनञ्जय महाराज'' जो वैदिक आध्यात्मिक वाङ्गमयी व्यास परम्परा कि विलक्षण तथा रसमयी वाग्धारा को प्रवाहित करने वाले परम संत हैं । जो हास्यात्मक एवं कवित्व कला से परिपूर्ण भागवत कथा के माध्यम से भक्तों के मन को अनायास ही भगवान श्री मुरली मनोहर कृष्ण के श्री चरणों में लगा देते हैं ।। स्वामी जी हिन्दी, गुजराती, अवधी एवं भोजपुरी में सरस भागवत कथा एवं श्री राम कथा कहते हैं । बदले में दक्षिणा की कोई मांग नहीं रखते जो मिल जाय उसी से संतुष्ट रहते हैं ।। स्वामी जी को ''वेंकटेश स्वामी का मंदिर'' सिलवासा (संघ शासित प्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली) में भगवत्कृपा से सेवा का अवसर मिला । पूरी निष्ठा से भगवान की सेवा की । भगवत्कृपा से आज भी वहीँ रहकर भगवान की सेवा करते हुए भागवत जी की कथा का देश-विदेशों में रसमय गायन करते हैं तथा भगवद्भक्ति (भगवान के श्री चरणों) में अपना जीवन समर्पित कर आनन्द का अनुभव करते हैं ।।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

error: Content is protected !!