HomeArticlesKrishna Prem Ki Shayariyanद्रौपदी का एक धागा।।

द्रौपदी का एक धागा।।

1.द्रौपदी का एक धागा।। Dropadi ka Ek Dhaga.

जब कृष्ण की उँगली कटी थी, द्रौपदी ने अपनी साड़ी फाड़कर पट्टी बाँधी थी — बिना सोचे, बिना गिने।।

वर्षों बाद, जब उसकी साड़ी खींची गई, कृष्ण ने वो एक धागा अनंत बना दिया।।

प्रेम का हिसाब ऐसे ही होता है। तुम एक धागा दो, वो तुम्हें आकाश दे देता है। तुम एक आँसू गिराओ, वो तुम्हें सागर दे देता है।।

बस — देने में कंजूसी मत करना।।

2.अंतिम बाँसुरी।। Antim Basuri.

Dropadi ka Ek Dhaga

कहते हैं जब कृष्ण वृंदावन छोड़कर गए, उन्होंने बाँसुरी वहीं छोड़ दी। फिर कभी नहीं बजाई।।

क्यों? क्योंकि वो बाँसुरी वृंदावन की थी — उन गलियों की, उन आँखों की, उस प्रेम की। वो संगीत द्वारका के महलों में नहीं गूँज सकता था।।

कुछ प्रेम ऐसे होते हैं — जो एक ही जगह खिलते हैं, एक ही समय में जीते हैं। उन्हें पकड़ने की कोशिश मत करो। उन्हें जी लो — पूरी तरह, एक ही बार।।

फिर वो तुम्हारे भीतर हमेशा बजते रहेंगे।।

 

जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।
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