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ऐसे में लोगों की प्रगति रुक जाती है।।

ऐसे में लोगों की प्रगति रुक जाती है।। Aapki Pragati Aise Rukati Hai.

जय श्रीमन्नारायण,

मित्रों, जब आप अपने जीवन में उबाऊ महशूस करने लगते हैं । भले ही वह नौकरी बदलने की बात हो, नई कला या कौशल सीखने का मौका हो या फिर घर या शहर बदलने का अवसर ।।

जब भी आपको लगे कि अब आपको जंग सा लग रहा है तो बदलाव के लिए कोशिश करें ।।

ऐसे में लोग पाते हैं कि वे एक ही जगह टिक से गए हैं और उन्होंने लंबे समय से कुछ नया नहीं सीखा। लेकिन फिर भी वे उसी जगह बने रहते हैं।।

ऐसे में धीरे-धीरे जीवन में नएपन का उत्साह खत्म सा होने लगता है।।

अगर आपको भी ऐसा लगता है कि आप वर्षों से एक ही जगह हैं और प्रगति रुक गई है तो आगे निकलने के बारे में आपको सोचना चाहिए।।

अगर आप ढर्रे पर चल रहे तो जीवन ऊबाऊ होना ही है। इसलिए जीवन को थोड़ा उलटते-पलटते रहना जरूरी होता है।।

अपने करियर में कुछ नए क्षेत्रों में हाथ आजमाना चाहिए । साधारण बदलावों के जरिए आप नई ऊर्जा पा सकते हैं।।

जब आप छोटे या बड़े बदलाव करेंगे तो वे आपको नई चीजें सीखने का मौका देंगे।।

यह स्वीकार करना कि अब आपने पिछले वर्षों में कुछ नहीं बदला आपको आगे बढ़ने में मदद अवश्य करेगा।।

।। नारायण सभी का कल्याण करें ।।
 
 
जयतु संस्कृतम् जयतु भारतम् ।।
 
जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।
Swami Ji Maharaj
Swami Ji Maharajhttp://sansthanam.com
''स्वामी धनञ्जय महाराज'' जो वैदिक आध्यात्मिक वाङ्गमयी व्यास परम्परा कि विलक्षण तथा रसमयी वाग्धारा को प्रवाहित करने वाले परम संत हैं । जो हास्यात्मक एवं कवित्व कला से परिपूर्ण भागवत कथा के माध्यम से भक्तों के मन को अनायास ही भगवान श्री मुरली मनोहर कृष्ण के श्री चरणों में लगा देते हैं ।। स्वामी जी हिन्दी, गुजराती, अवधी एवं भोजपुरी में सरस भागवत कथा एवं श्री राम कथा कहते हैं । बदले में दक्षिणा की कोई मांग नहीं रखते जो मिल जाय उसी से संतुष्ट रहते हैं ।। स्वामी जी को ''वेंकटेश स्वामी का मंदिर'' सिलवासा (संघ शासित प्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली) में भगवत्कृपा से सेवा का अवसर मिला । पूरी निष्ठा से भगवान की सेवा की । भगवत्कृपा से आज भी वहीँ रहकर भगवान की सेवा करते हुए भागवत जी की कथा का देश-विदेशों में रसमय गायन करते हैं तथा भगवद्भक्ति (भगवान के श्री चरणों) में अपना जीवन समर्पित कर आनन्द का अनुभव करते हैं ।।
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