1. राधा का मौन।। Radha Ka Maun.
राधा कभी कृष्ण के साथ द्वारका नहीं गई। न कोई विवाह हुआ, न कोई वचन। फिर भी — सारे जगत में जब कृष्ण का नाम लिया जाता है, राधा का नाम पहले आता है।।
प्रेम को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती। राधा ने कुछ माँगा नहीं, कुछ पाया नहीं — फिर भी सब कुछ पा लिया।।
यही प्रेम की पराकाष्ठा है — जहाँ मिलन भी गौण हो जाए, और विरह भी उत्सव बन जाए।।
2. यमुना के तट पर।। Yamuna Ka Tat.

यमुना आज भी बहती है — वही जल, वही तट। पर अब वहाँ वो पदचिह्न नहीं दिखते।।
शायद इसलिए कि हम आँखों से देखते हैं, और वो हृदय से दिखते हैं। जिसने एक बार सच्चे प्रेम से यमुना को छुआ है, उसे आज भी वो पीताम्बर दिखाई देता है — जल में नहीं, अपने भीतर।।
नदियाँ बाहर नहीं बहतीं — वो भीतर बहती हैं। और कृष्ण? वो उसी धारा में मिलते हैं।।
जय श्रीमन्नारायण ।।
