HomeArticlesKrishna Prem Ki Shayariyanयमुना के तट पर।।

यमुना के तट पर।।

1. राधा का मौन।। Radha Ka Maun.

राधा कभी कृष्ण के साथ द्वारका नहीं गई। न कोई विवाह हुआ, न कोई वचन। फिर भी — सारे जगत में जब कृष्ण का नाम लिया जाता है, राधा का नाम पहले आता है।।

प्रेम को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती। राधा ने कुछ माँगा नहीं, कुछ पाया नहीं — फिर भी सब कुछ पा लिया।।

यही प्रेम की पराकाष्ठा है — जहाँ मिलन भी गौण हो जाए, और विरह भी उत्सव बन जाए।।

2. यमुना के तट पर।। Yamuna Ka Tat.

Pritam Ko Prembhari Shayari

यमुना आज भी बहती है — वही जल, वही तट। पर अब वहाँ वो पदचिह्न नहीं दिखते।।

शायद इसलिए कि हम आँखों से देखते हैं, और वो हृदय से दिखते हैं। जिसने एक बार सच्चे प्रेम से यमुना को छुआ है, उसे आज भी वो पीताम्बर दिखाई देता है — जल में नहीं, अपने भीतर।।

नदियाँ बाहर नहीं बहतीं — वो भीतर बहती हैं। और कृष्ण? वो उसी धारा में मिलते हैं।।

 

जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।
Swami Ji Maharaj
Swami Ji Maharajhttp://sansthanam.com
''स्वामी धनञ्जय महाराज'' जो वैदिक आध्यात्मिक वाङ्गमयी व्यास परम्परा कि विलक्षण तथा रसमयी वाग्धारा को प्रवाहित करने वाले परम संत हैं । जो हास्यात्मक एवं कवित्व कला से परिपूर्ण भागवत कथा के माध्यम से भक्तों के मन को अनायास ही भगवान श्री मुरली मनोहर कृष्ण के श्री चरणों में लगा देते हैं ।। स्वामी जी हिन्दी, गुजराती, अवधी एवं भोजपुरी में सरस भागवत कथा एवं श्री राम कथा कहते हैं । बदले में दक्षिणा की कोई मांग नहीं रखते जो मिल जाय उसी से संतुष्ट रहते हैं ।। स्वामी जी को ''वेंकटेश स्वामी का मंदिर'' सिलवासा (संघ शासित प्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली) में भगवत्कृपा से सेवा का अवसर मिला । पूरी निष्ठा से भगवान की सेवा की । भगवत्कृपा से आज भी वहीँ रहकर भगवान की सेवा करते हुए भागवत जी की कथा का देश-विदेशों में रसमय गायन करते हैं तथा भगवद्भक्ति (भगवान के श्री चरणों) में अपना जीवन समर्पित कर आनन्द का अनुभव करते हैं ।।
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