1.मोरपंख का प्रश्न।। Morpankh Ka Prashn.
मोर नाचता है बादलों को देखकर — बिना किसी अपेक्षा के, बिना किसी दर्शक के। उसका नृत्य शुद्ध आनंद है।।
कृष्ण ने उसी का पंख चुना — क्योंकि प्रेम भी ऐसा ही होना चाहिए। बिना शर्त, बिना हिसाब।।
जो प्रेम में कुछ माँगता है, वो प्रेम नहीं — सौदा है। मोरपंख याद दिलाता है: नाचो — बस इसलिए कि बादल घिरे हैं, इसलिए नहीं कि कोई देख रहा है।।
2. गोकुल छोड़ते समय।। Gokul Chhodate Samay.

कहते हैं जब कृष्ण मथुरा गए, गोकुल में एक भी आँख सूखी नहीं थी। गोपियाँ रोईं, यशोदा रोईं, गायें तक रोईं।।
पर कृष्ण? उनकी आँखों में आँसू नहीं थे — उनकी आँखों में वचन था। वो जानते थे: जो सच में जुड़ा है, वो दूरी से नहीं टूटता।।
विरह प्रेम का अंत नहीं — विरह प्रेम की परीक्षा है। और जो इस परीक्षा में खरा उतरता है, उसके लिए कृष्ण कभी गए ही नहीं।।
कभी तो आ भी जाओ प्रियतम ! क्योंकि प्यारे ! आपके बिना हमारा कोई आस्तित्व ही नहीं बचता ।।
जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।



