Home Articles Krishna Prem Ki Shayariyan मोरपंख का प्रश्न।।

मोरपंख का प्रश्न।।

0
26
Morpankh Ka Prashn
Morpankh Ka Prashn

1.मोरपंख का प्रश्न।। Morpankh Ka Prashn.

मोर नाचता है बादलों को देखकर — बिना किसी अपेक्षा के, बिना किसी दर्शक के। उसका नृत्य शुद्ध आनंद है।।

कृष्ण ने उसी का पंख चुना — क्योंकि प्रेम भी ऐसा ही होना चाहिए। बिना शर्त, बिना हिसाब।।

जो प्रेम में कुछ माँगता है, वो प्रेम नहीं — सौदा है। मोरपंख याद दिलाता है: नाचो — बस इसलिए कि बादल घिरे हैं, इसलिए नहीं कि कोई देख रहा है।।

2. गोकुल छोड़ते समय।। Gokul Chhodate Samay.

Morpankh Ka Prashn

कहते हैं जब कृष्ण मथुरा गए, गोकुल में एक भी आँख सूखी नहीं थी। गोपियाँ रोईं, यशोदा रोईं, गायें तक रोईं।।

पर कृष्ण? उनकी आँखों में आँसू नहीं थे — उनकी आँखों में वचन था। वो जानते थे: जो सच में जुड़ा है, वो दूरी से नहीं टूटता।।

विरह प्रेम का अंत नहीं — विरह प्रेम की परीक्षा है। और जो इस परीक्षा में खरा उतरता है, उसके लिए कृष्ण कभी गए ही नहीं।।

कभी तो आ भी जाओ प्रियतम ! क्योंकि प्यारे ! आपके बिना हमारा कोई आस्तित्व ही नहीं बचता ।।

 

Sansthanam:     Swami Ji:    Swami Ji Blog:   Sansthanam Blog:    facebook Page.
जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।
Previous articleयमुना के तट पर।।
Next articleसुदामा के चावल।।
Swami Ji Maharaj
''स्वामी धनञ्जय महाराज'' जो वैदिक आध्यात्मिक वाङ्गमयी व्यास परम्परा कि विलक्षण तथा रसमयी वाग्धारा को प्रवाहित करने वाले परम संत हैं । जो हास्यात्मक एवं कवित्व कला से परिपूर्ण भागवत कथा के माध्यम से भक्तों के मन को अनायास ही भगवान श्री मुरली मनोहर कृष्ण के श्री चरणों में लगा देते हैं ।। स्वामी जी हिन्दी, गुजराती, अवधी एवं भोजपुरी में सरस भागवत कथा एवं श्री राम कथा कहते हैं । बदले में दक्षिणा की कोई मांग नहीं रखते जो मिल जाय उसी से संतुष्ट रहते हैं ।। स्वामी जी को ''वेंकटेश स्वामी का मंदिर'' सिलवासा (संघ शासित प्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली) में भगवत्कृपा से सेवा का अवसर मिला । पूरी निष्ठा से भगवान की सेवा की । भगवत्कृपा से आज भी वहीँ रहकर भगवान की सेवा करते हुए भागवत जी की कथा का देश-विदेशों में रसमय गायन करते हैं तथा भगवद्भक्ति (भगवान के श्री चरणों) में अपना जीवन समर्पित कर आनन्द का अनुभव करते हैं ।।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

error: Content is protected !!