Home Articles Krishna Prem Ki Shayariyan माखन चोरी का रहस्य।।

माखन चोरी का रहस्य।।

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Makhan Chori Ka Rahasya
Makhan Chori Ka Rahasya

1. बाँसुरी की पुकार।। Basuri Ki Pukar.

वो जो बाँसुरी बजाता है, वो खोखलेपन को संगीत में बदलता है। जब तक बाँस में गाँठें थीं, वो जंगल में खड़ा था — मूक, अकेला। जब उसने अपना अहं त्यागा, जब वो भीतर से रिक्त हुआ, तभी उसमें से राग निकला।।

प्रेम भी ऐसा ही है। जब तक ‘मैं’ भरा है, प्रियतम की धुन कहाँ समाएगी? खाली हो जाओ — तुम्हारे भीतर से भी वही मुरली बजेगी जो वृंदावन में बजी थी।।

कृष्ण बाँसुरी नहीं बजाते — वो तुम्हें बजाना चाहते हैं।।

2. माखन चोरी का रहस्य।। Makhan Chori Ka Rahasya.

Makhan Chori Ka Rahasya

कहते हैं वो माखन चुराता था। पर सोचो — जिसके इशारे पर ब्रह्मांड नाचता है, उसे माखन की क्या आवश्यकता?

वो माखन नहीं चुराता था — वो बहाना ढूँढता था। बहाना — गोपियों के घर जाने का, उनकी आँखों में झाँकने का, उनके हृदय में बसने का।।

चोरी तो हम करते हैं — उससे प्रेम का, फिर उसे भूल जाने का। वो तो बस लौटाने आता है — जो हमने कभी उसे दिया था, और जो हम भूल गए हैं।।

कभी तो आ भी जाओ प्रियतम ! क्योंकि प्यारे ! आपके बिना हमारा कोई आस्तित्व ही नहीं बचता ।।

 

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जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।
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Swami Ji Maharaj
''स्वामी धनञ्जय महाराज'' जो वैदिक आध्यात्मिक वाङ्गमयी व्यास परम्परा कि विलक्षण तथा रसमयी वाग्धारा को प्रवाहित करने वाले परम संत हैं । जो हास्यात्मक एवं कवित्व कला से परिपूर्ण भागवत कथा के माध्यम से भक्तों के मन को अनायास ही भगवान श्री मुरली मनोहर कृष्ण के श्री चरणों में लगा देते हैं ।। स्वामी जी हिन्दी, गुजराती, अवधी एवं भोजपुरी में सरस भागवत कथा एवं श्री राम कथा कहते हैं । बदले में दक्षिणा की कोई मांग नहीं रखते जो मिल जाय उसी से संतुष्ट रहते हैं ।। स्वामी जी को ''वेंकटेश स्वामी का मंदिर'' सिलवासा (संघ शासित प्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली) में भगवत्कृपा से सेवा का अवसर मिला । पूरी निष्ठा से भगवान की सेवा की । भगवत्कृपा से आज भी वहीँ रहकर भगवान की सेवा करते हुए भागवत जी की कथा का देश-विदेशों में रसमय गायन करते हैं तथा भगवद्भक्ति (भगवान के श्री चरणों) में अपना जीवन समर्पित कर आनन्द का अनुभव करते हैं ।।

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