1. बाँसुरी की पुकार।। Basuri Ki Pukar.
वो जो बाँसुरी बजाता है, वो खोखलेपन को संगीत में बदलता है। जब तक बाँस में गाँठें थीं, वो जंगल में खड़ा था — मूक, अकेला। जब उसने अपना अहं त्यागा, जब वो भीतर से रिक्त हुआ, तभी उसमें से राग निकला।।
प्रेम भी ऐसा ही है। जब तक ‘मैं’ भरा है, प्रियतम की धुन कहाँ समाएगी? खाली हो जाओ — तुम्हारे भीतर से भी वही मुरली बजेगी जो वृंदावन में बजी थी।।
कृष्ण बाँसुरी नहीं बजाते — वो तुम्हें बजाना चाहते हैं।।
2. माखन चोरी का रहस्य।। Makhan Chori Ka Rahasya.

कहते हैं वो माखन चुराता था। पर सोचो — जिसके इशारे पर ब्रह्मांड नाचता है, उसे माखन की क्या आवश्यकता?
वो माखन नहीं चुराता था — वो बहाना ढूँढता था। बहाना — गोपियों के घर जाने का, उनकी आँखों में झाँकने का, उनके हृदय में बसने का।।
चोरी तो हम करते हैं — उससे प्रेम का, फिर उसे भूल जाने का। वो तो बस लौटाने आता है — जो हमने कभी उसे दिया था, और जो हम भूल गए हैं।।
कभी तो आ भी जाओ प्रियतम ! क्योंकि प्यारे ! आपके बिना हमारा कोई आस्तित्व ही नहीं बचता ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।
