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कृष्ण-दर्शन की मधुरता।।

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Krishna Darshan Ki Madhurata
Krishna Darshan Ki Madhurata

कृष्ण-दर्शन की मधुरता।। Krishna Darshan Ki Madhurata.

भूमिका:- कृष्ण-दर्शन केवल नेत्रों का अनुभव नहीं, अपितु अंतःकरण की गहराइयों तक उतर जाने वाला एक दिव्य साक्षात्कार है। उनकी मुस्कान, उनकी मुरली और उनका करुणामय स्वरूप भक्त के हृदय में प्रेम का अनंत सागर प्रवाहित कर देता है। यह रचना उसी दिव्य अनुभूति की अभिव्यक्ति है। श्रीकृष्ण के दिव्य दर्शन, मुस्कान और प्रेममय स्वरूप पर आधारित यह संस्कृतनिष्ठ हिंदी शायरी-संग्रह अत्यंत भावपूर्ण है।।

शायरी:-

Krishna Darshan Ki Madhurata
कृष्ण से यदि नयन मिल जाएँ, तो जग का विस्मरण हो जाता।।

प्रेम की मधुर वृष्टि में मन, सहज ही पावन हो जाता।।

तेरे बिना यह हृदय न जाने, अपनी कथा कैसे कह पाए।।
कान्हा तेरे नाम के बिना, कौन इसे अर्थ दे पाए।।

मुरलीधर की मुस्कान में ही, समस्त जगत समा जाता है।।
प्रेम का जो परम स्वरूप है, वह तुझमें ही प्रतिबिंबित आता है।।

मुझे न और कुछ चाहिए, केवल तेरा पावन नाम रहे।।
मेरे प्रत्येक शब्द में हे प्रभु, श्रीकृष्ण का ही धाम रहे।।

Krishna Darshan Ki Madhurata

कभी तो आ भी जाओ प्रियतम ! क्योंकि प्यारे ! आपके बिना हमारा कोई आस्तित्व ही नहीं बचता ।।

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जय जय श्री राधे ।।
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Swami Ji Maharaj
''स्वामी धनञ्जय महाराज'' जो वैदिक आध्यात्मिक वाङ्गमयी व्यास परम्परा कि विलक्षण तथा रसमयी वाग्धारा को प्रवाहित करने वाले परम संत हैं । जो हास्यात्मक एवं कवित्व कला से परिपूर्ण भागवत कथा के माध्यम से भक्तों के मन को अनायास ही भगवान श्री मुरली मनोहर कृष्ण के श्री चरणों में लगा देते हैं ।। स्वामी जी हिन्दी, गुजराती, अवधी एवं भोजपुरी में सरस भागवत कथा एवं श्री राम कथा कहते हैं । बदले में दक्षिणा की कोई मांग नहीं रखते जो मिल जाय उसी से संतुष्ट रहते हैं ।। स्वामी जी को ''वेंकटेश स्वामी का मंदिर'' सिलवासा (संघ शासित प्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली) में भगवत्कृपा से सेवा का अवसर मिला । पूरी निष्ठा से भगवान की सेवा की । भगवत्कृपा से आज भी वहीँ रहकर भगवान की सेवा करते हुए भागवत जी की कथा का देश-विदेशों में रसमय गायन करते हैं तथा भगवद्भक्ति (भगवान के श्री चरणों) में अपना जीवन समर्पित कर आनन्द का अनुभव करते हैं ।।

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