Home Articles Krishna Prem Ki Shayariyan प्रेम का परम स्वरूप।।

प्रेम का परम स्वरूप।।

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Prem Ka Swarup
Prem Ka Swarup

प्रेम का परम स्वरूप।। Prem Ka Swarup.

भूमिका:- श्रीकृष्ण प्रेम के सर्वोच्च स्वरूप हैं। उनके भीतर अनुराग, माधुर्य, करुणा और सौंदर्य — सबका दिव्य समन्वय है। भक्त उनके प्रेम में डूबकर स्वयं को पाता है। यह रचना उसी परम प्रेम का अभिव्यंजन है। श्रीकृष्ण को प्रेम के परम स्वरूप के रूप में चित्रित करती यह संस्कृतनिष्ठ हिंदी शायरी भाव, माधुर्य और साधना से परिपूर्ण है।।

शायरी:-

कृष्ण स्वयं प्रेम के परम, अनुपम और उदात्त रूप हैं।।
उनके बिना सब रंग फीके, सब सौंदर्य अपूर्ण रूप हैं।।

हृदय में यदि उनका वास हो, तो जीवन में मधुरता आए।।
साधना की हर एक बेला में, शुभता का दीप जल जाए।।

प्रेम यदि निष्कपट हो जाए, तो प्रभु अवश्य मिल जाते।।
भावों की निर्मल सरिता में, वे स्वयं ही उतर आते।।

 

Prem Ka Swarup

 

मुझको केवल इतना वर दो, तेरा प्रेम सदा बना रहे।।
मेरे जीवन के प्रत्येक क्षण में, तेरा ही रस भरा रहे।।

कभी तो आ भी जाओ प्रियतम ! क्योंकि प्यारे ! आपके बिना हमारा कोई आस्तित्व ही नहीं बचता ।।

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जय जय श्री राधे ।।
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Swami Ji Maharaj
''स्वामी धनञ्जय महाराज'' जो वैदिक आध्यात्मिक वाङ्गमयी व्यास परम्परा कि विलक्षण तथा रसमयी वाग्धारा को प्रवाहित करने वाले परम संत हैं । जो हास्यात्मक एवं कवित्व कला से परिपूर्ण भागवत कथा के माध्यम से भक्तों के मन को अनायास ही भगवान श्री मुरली मनोहर कृष्ण के श्री चरणों में लगा देते हैं ।। स्वामी जी हिन्दी, गुजराती, अवधी एवं भोजपुरी में सरस भागवत कथा एवं श्री राम कथा कहते हैं । बदले में दक्षिणा की कोई मांग नहीं रखते जो मिल जाय उसी से संतुष्ट रहते हैं ।। स्वामी जी को ''वेंकटेश स्वामी का मंदिर'' सिलवासा (संघ शासित प्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली) में भगवत्कृपा से सेवा का अवसर मिला । पूरी निष्ठा से भगवान की सेवा की । भगवत्कृपा से आज भी वहीँ रहकर भगवान की सेवा करते हुए भागवत जी की कथा का देश-विदेशों में रसमय गायन करते हैं तथा भगवद्भक्ति (भगवान के श्री चरणों) में अपना जीवन समर्पित कर आनन्द का अनुभव करते हैं ।।

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