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कृष्ण-नाम का प्रकाश।।

कृष्ण-नाम का प्रकाश।। Krishna Nam Ka Prakash.

भूमिका:-

कृष्ण-नाम का स्मरण केवल उच्चारण नहीं, बल्कि एक आंतरिक साधना है, जो मन को निर्मल और चेतना को प्रकाशित करती है। यह नाम स्वयं में ही एक दिव्य प्रकाश है। इस रचना में उसी आलोक का वर्णन है। श्रीकृष्ण-नाम की महिमा, उसके आलोक और आध्यात्मिक प्रभाव पर आधारित यह संस्कृतनिष्ठ हिंदी शायरी अत्यंत प्रभावशाली है।।

शायरी:-

कृष्ण-नाम का दीप जले तो, अंधकार नहीं रह पाता।।
मन का हर एक संशय उस क्षण, मौन होकर बिखर जाता।।

श्रीहरि का स्मरण करते ही, अंतर में उजियारा छाए।।
भ्रांतियों का घना कुहासा, स्वयं विलीन हो जाए।।

जिसने नित्य उनका नाम लिया, उसने सत्य को पा लिया।।
जीवन के इस पथ पर उसने, अनमोल अमृत पा लिया।।

Krishna Nam Ka Prakash

कृष्ण-नाम का एक उच्चारण, कोटि यज्ञ से बढ़कर है।।
भक्त के लिए यही मंत्र सदा, सर्वश्रेष्ठ और सुन्दर है।।

जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।
Swami Ji Maharaj
Swami Ji Maharajhttp://sansthanam.com
''स्वामी धनञ्जय महाराज'' जो वैदिक आध्यात्मिक वाङ्गमयी व्यास परम्परा कि विलक्षण तथा रसमयी वाग्धारा को प्रवाहित करने वाले परम संत हैं । जो हास्यात्मक एवं कवित्व कला से परिपूर्ण भागवत कथा के माध्यम से भक्तों के मन को अनायास ही भगवान श्री मुरली मनोहर कृष्ण के श्री चरणों में लगा देते हैं ।। स्वामी जी हिन्दी, गुजराती, अवधी एवं भोजपुरी में सरस भागवत कथा एवं श्री राम कथा कहते हैं । बदले में दक्षिणा की कोई मांग नहीं रखते जो मिल जाय उसी से संतुष्ट रहते हैं ।। स्वामी जी को ''वेंकटेश स्वामी का मंदिर'' सिलवासा (संघ शासित प्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली) में भगवत्कृपा से सेवा का अवसर मिला । पूरी निष्ठा से भगवान की सेवा की । भगवत्कृपा से आज भी वहीँ रहकर भगवान की सेवा करते हुए भागवत जी की कथा का देश-विदेशों में रसमय गायन करते हैं तथा भगवद्भक्ति (भगवान के श्री चरणों) में अपना जीवन समर्पित कर आनन्द का अनुभव करते हैं ।।
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