HomeUncategorizedमुरलीधर का माधुर्य।। Muralidhar Ka Madhurya

मुरलीधर का माधुर्य।। Muralidhar Ka Madhurya

मुरलीधर का माधुर्य।। Muralidhar Ka Madhurya.

भूमिका:- मुरलीधर श्रीकृष्ण के माधुर्य, लीला और भक्ति-भाव पर आधारित यह संस्कृतनिष्ठ हिंदी शायरी-पाठ मन को स्पर्श करता है। मुरलीधर श्रीकृष्ण के स्वर में वह दिव्यता है, जो मनुष्य के अंतःकरण को सहज ही आकर्षित कर लेती है। उनकी लीला, उनका सौंदर्य और उनका करुणामय प्रेम — सब कुछ भक्त के हृदय में अनंत श्रद्धा का संचार करता है। यह रचना उसी माधुर्य और शरणागति का भाव-विस्तार है।।

Muralidhar Ka Madhurya

शायरी:-

मुरली की मधुर तान सुनकर, मन का विषाद विलीन हुआ।
कान्हा का नाम लेते ही, जीवन सुमधुर नवीन हुआ।।

गोकुल के वह नटवर नागर, सबके हृदय को भाते हैं।
प्रेम-पथ के पथिकों को वे, सदा सही मार्ग दिखाते हैं।।

उनकी लीला का क्या वर्णन, प्रति क्षण एक संदेश नया।
जिसने हृदय से उन्हें अपनाया, उसने पाया जीवन-धन सदा।।
Muralidhar Ka Madhurya

कान्हा की एक झलक भर से, प्रेम-सागर उमड़ आता है।
उनके बिना यह जीवन-सरिता, अधूरी-सी रह जाती है।।

 

जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।
Swami Ji Maharaj
Swami Ji Maharajhttp://sansthanam.com
''स्वामी धनञ्जय महाराज'' जो वैदिक आध्यात्मिक वाङ्गमयी व्यास परम्परा कि विलक्षण तथा रसमयी वाग्धारा को प्रवाहित करने वाले परम संत हैं । जो हास्यात्मक एवं कवित्व कला से परिपूर्ण भागवत कथा के माध्यम से भक्तों के मन को अनायास ही भगवान श्री मुरली मनोहर कृष्ण के श्री चरणों में लगा देते हैं ।। स्वामी जी हिन्दी, गुजराती, अवधी एवं भोजपुरी में सरस भागवत कथा एवं श्री राम कथा कहते हैं । बदले में दक्षिणा की कोई मांग नहीं रखते जो मिल जाय उसी से संतुष्ट रहते हैं ।। स्वामी जी को ''वेंकटेश स्वामी का मंदिर'' सिलवासा (संघ शासित प्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली) में भगवत्कृपा से सेवा का अवसर मिला । पूरी निष्ठा से भगवान की सेवा की । भगवत्कृपा से आज भी वहीँ रहकर भगवान की सेवा करते हुए भागवत जी की कथा का देश-विदेशों में रसमय गायन करते हैं तथा भगवद्भक्ति (भगवान के श्री चरणों) में अपना जीवन समर्पित कर आनन्द का अनुभव करते हैं ।।
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