HomeArticlesKrishna Prem Ki Shayariyanकृष्ण प्रेम की पुकार।। Krishna Prem Ki Pukar

कृष्ण प्रेम की पुकार।। Krishna Prem Ki Pukar

कृष्ण प्रेम की पुकार।। Krishna Prem Ki Pukar

मित्रों, भगवान श्रीकृष्ण हमारे (सनातनियों के) केवल आराध्य नहीं, अपितु प्रेम, माधुर्य और परम शरणागति के दिव्य प्रतीक हैं। उनके नाम का स्मरण हृदय में ऐसा आलोक भर देता है, जो जीवन की प्रत्येक क्षणिक पीड़ा को शांत कर देता है। प्रस्तुत शायरी में उसी अनन्य प्रेम और भक्ति-भाव का सुमधुर चित्रण किया गया है।।

Krishna Prem Ki Pukar

शायरी:-

श्रीकृष्ण के प्रेम-सरोवर में, यह मन प्रतिपल स्नान करे।
मुरलीधर गिरिधर गोपाल, बस तेरा ही ध्यान धरे।।

तेरे नाम-स्मरण की ध्वनि जब, अंतर में मधुर बजती है।
जीवन की अँधियारी गलियों में, नव-प्रभा सी रचती है।।

राधा-सी प्रीति न माँगी, केवल तेरा सान्निध्य मिले।
तेरे श्रीचरणों की रज ही, जीवन का अनुपम फल मिले।।

Krishna Prem Ki Pukar

कृष्ण-रंग में अनुरंजित होकर, मन ने यह सत्य पहचाना।
प्रेम से परे जगत में कोई, और न मंगल-महामाना।।

 

जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।
Swami Ji Maharaj
Swami Ji Maharajhttp://sansthanam.com
''स्वामी धनञ्जय महाराज'' जो वैदिक आध्यात्मिक वाङ्गमयी व्यास परम्परा कि विलक्षण तथा रसमयी वाग्धारा को प्रवाहित करने वाले परम संत हैं । जो हास्यात्मक एवं कवित्व कला से परिपूर्ण भागवत कथा के माध्यम से भक्तों के मन को अनायास ही भगवान श्री मुरली मनोहर कृष्ण के श्री चरणों में लगा देते हैं ।। स्वामी जी हिन्दी, गुजराती, अवधी एवं भोजपुरी में सरस भागवत कथा एवं श्री राम कथा कहते हैं । बदले में दक्षिणा की कोई मांग नहीं रखते जो मिल जाय उसी से संतुष्ट रहते हैं ।। स्वामी जी को ''वेंकटेश स्वामी का मंदिर'' सिलवासा (संघ शासित प्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली) में भगवत्कृपा से सेवा का अवसर मिला । पूरी निष्ठा से भगवान की सेवा की । भगवत्कृपा से आज भी वहीँ रहकर भगवान की सेवा करते हुए भागवत जी की कथा का देश-विदेशों में रसमय गायन करते हैं तथा भगवद्भक्ति (भगवान के श्री चरणों) में अपना जीवन समर्पित कर आनन्द का अनुभव करते हैं ।।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments