तुम खुद गुलाब हो प्यारे ! तुझे क्या गुलाब दूँ।।

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Tujhe Kya Gulab Dun
Tujhe Kya Gulab Dun

तुम तो खुद गुलाब हो प्यारे ! तुझको क्या गुलाब दूँ।। Tum To Khud Gulab Ho Pyare! Tujhe Kya Gulab Dun.

जय श्रीमन्नारायण,
       प्यारे कन्हैया, प्यारे कान्हा जी !
                  मैं तुम्हें इतने प्यार से बुलाता हूँ, कभी भूलकर ही सही “आ भी जाओ प्यारे” ।।
प्यारे ! तुम्हारी अदा का क्या जवाब दूँ ।
मेरे प्रियतम ! तुझे क्या उपहार दूँ ।।
कोई अच्छा सा फूल होता तो माली से मंगवाता ।
प्यारे ! तुम तो खुद गुलाब हो, तुझको क्या गुलाब दूँ ।।

Tujhe Kya Gulab Dun

जो पल पल चलती रहे, उसे जिंदगी कहते है ।
जो हरपल जलती रहे, उसे रोशनी कहते है ।।
जो साथ न छोड़े कभी, उसे दोस्ती कहते है ।
लेकिन जो पलपल रुलाये, उसे आशिकी कहते है ।।
प्यारे ! हर वक़्त तेरे आने की आस रहती है ।
हर पल तुमसे मिलने की प्यास रहती है ।।
सब कुछ दिया है तूने, बस तूं ही यहाँ नहीं है ।
इसलिए प्यारे ! मेरी ज़िन्दगी ही उदास लगती है ।।
Tujhe Kya Gulab Dun
तू हमसफ़र, तू हम डगर, तू हमराज, नजर आता है।
मेरी अधूरी सी जिंदगी का.. ख्वाब नजर तूं आता है।।
कैसी उदास है जिंदगी प्रियतम तेरे बिन हर लम्हा।
मेरे हर लम्हे में सिर्फ तेरा ही अहसास नजर आता है।।
प्यारे ! रह रह के मुझे इतना क्यूँ रुलाते हो ।
याद कर तो सकते नहीं तो याद क्यूँ आते हो ।।
जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।

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