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जाने क्यूँ आजकल तुम्हारी कमी बहुत अखरती है।। Tumhari kami Bahut Akharati Hai

जाने क्यूँ आजकल, तुम्हारी कमी बहुत अखरती है।। Janen Kyon Aajkal Tumhari kami Bahut Akharati Hai.

जय श्रीमन्नारायण,
प्यारे कन्हैया, प्यारे कान्हा जी !

 

जाने क्यूँ आजकल, तुम्हारी कमी बहुत अखरती है ।
याद करते-करते अकेले में, ज़िन्दगी बहुत सिसकती है ।।

 

पनपने नहीं देता कभी, संसार की मामूली सी ख़्वाहिशों को ।
तुम्हारी यादों से ध्यान हटाने की, जो कोशिश बहुत करती है ।।

 

कोशिश करते हैं लोग, जो तुझसे ध्यान हटाने का मेरा ।
किसी न किसी बहाने से, मेरा दिल याद तुझे बहुत करती है ।।

 

Meri Bhi Jaan Likh De
Meri Bhi Jaan Likh De

परन्तु प्यारे !

इंतजार करते-करते सब्र की हद हो चली हैं ।
दर्द-ए-दिल कहना हैं अब मुश्किल…
…….और यह आँखें वीरान हो चली हैं ।।

 

कब तक करेंगे इंतजार अब तो उम्र भी हो चली है ।
हम पे तरस खाके अब तो मौत भी पास आने वाली है ।।

 

ज़िन्दगी के उलझे सवालों के जवाब ढूंढता हूँ ।
कर सके जो दर्द कम, वोह नशा ढूंढता हूँ ।।
संसार से मजबूर, हालात से लाचार हूँ मैं ।
कहीं मिले आपसे मिलने का बहाना ऐसी राह ढूंढता हूँ ।।
Shastra Gyan Sarvottam Hota Hai
Shastra Gyan Sarvottam Hota Hai
आखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते हो ।
जब भी मन में आये क्यों रुला देते हो ।।
तिरछी हैं निगाहें और मीठे हैं बोल तेरे ।
ये कैसी मोहब्बत हैं जो तुम मुझसे करते हो ।।

 

 

जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।

Swami Ji Maharaj
Swami Ji Maharajhttp://sansthanam.com
''स्वामी धनञ्जय महाराज'' जो वैदिक आध्यात्मिक वाङ्गमयी व्यास परम्परा कि विलक्षण तथा रसमयी वाग्धारा को प्रवाहित करने वाले परम संत हैं । जो हास्यात्मक एवं कवित्व कला से परिपूर्ण भागवत कथा के माध्यम से भक्तों के मन को अनायास ही भगवान श्री मुरली मनोहर कृष्ण के श्री चरणों में लगा देते हैं ।। स्वामी जी हिन्दी, गुजराती, अवधी एवं भोजपुरी में सरस भागवत कथा एवं श्री राम कथा कहते हैं । बदले में दक्षिणा की कोई मांग नहीं रखते जो मिल जाय उसी से संतुष्ट रहते हैं ।। स्वामी जी को ''वेंकटेश स्वामी का मंदिर'' सिलवासा (संघ शासित प्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली) में भगवत्कृपा से सेवा का अवसर मिला । पूरी निष्ठा से भगवान की सेवा की । भगवत्कृपा से आज भी वहीँ रहकर भगवान की सेवा करते हुए भागवत जी की कथा का देश-विदेशों में रसमय गायन करते हैं तथा भगवद्भक्ति (भगवान के श्री चरणों) में अपना जीवन समर्पित कर आनन्द का अनुभव करते हैं ।।
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