चाय पीना बहुत ज्यादा नुकसान करता है?

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Chay Pina Nukashandeh Hai
Chay Pina Nukashandeh Hai

चाय पीने से क्या-क्या और कितना तक नुकसान हो सकता है?।। Chay Pina Nukashandeh Hai.

जय श्रीमन्नारायण,

मित्रों, अगर आप चाय बनाते है, तो उसमें चाय से ज्यादा नुकसानदायक चीनी है। ये जो sugar है चीनी, इसका चाय के साथ कोई मेल नहीं है। अगर आप चाय पी रहे हैं तो कोशिश करें छोड़ने का और मत पीये, क्यूंकि यह चाय आपके तासीर के अनुकूल नहीं है। चाय के जो chemical हैं, वो हमारे भारत के लिए उपयोगी नहीं है।।

हाँ यह चाय Europe और America जैसे देशों के लिए बहुत अच्छा है। क्यूंकि इन दोषों की जलवायु ठंढी है परन्तु गरम देशों में चाय और coffee ठीक अर्थात उपयोगी न होकर हानिकारक है। फिर भी अगर आप चाय पी रहें हैं, आप मानते हैं, कि यह खराब है, लेकिन आदत है तो क्या करें? ऐसी स्थिति में मैं आपलोगों को एक तरीका बताता हूँ।।

मित्रों, अपने चाय पीने की आदत को आप छोड़ नहीं सकते तो चाय पीजिये परन्तु उसके पीने का तरीका बदल दीजिये। करना ये हैं आपको की चाय तो वही रहेगी परन्तु चीनी की जगह गुड का प्रयोग करके चाय पीजिये। मैं बताता हूँ, गुड क्षारीय होता है और चीनी आम्लीय होता है। चीनी जब विघटित अर्थात गलती है (disintegrate) होती है तो अंतिम परिणाम जो है वो एक acid के रूप में होती है।।

परन्तु गुड जब जब विघटित अर्थात गलता है (disintegrate) होती है तो उसको अंतिम परिणाम क्षारीय है। पेट में वैसे ही अम्ल रहता ही है और सुबह तो पेट में ज्यादा अम्ल होता है। ऐसे में उसी समय अगर चीनी मिलाई हुई चाय पीयेंगे तो ये आपके गैस्टिक acidity को और ज्यादा बढाएगी। इसलिए आपकी जिन्दगी और परेशान हो इससे तो बेहतर है, कि आप चाय पीये तो गुडवाली पीये।।

मित्रों, एक और बात ध्यान देनेवाली है, कि गुडवाली चाय में दूध नहीं डाल सकते, क्योंकि दूध फट जायेगा। दूध और गुड एक दुसरे के मित्र नहीं होते इनकी आपस में दोस्ती नही है। इसलिए बिना दूध की चाय पीये तो आप काली चाय पी सकते हैं गुड डाल कर। अगर काली चाय में गुड डालकर आप पी रहे है तो उसमें थोडा सा नींबू का रस डाल लीजिये क्योंकि यह चाय neutralize हो जायेगी।।

नींबू का रस acidic है, गुड का रस क्षारीय है ऐसे में गुड मिलायी हुई चाय को अगर neutral करना है तो थोडा नींबू डालकर नींबू की चाय पीयें। ठीक है? गुड डाला चाय में तो क्षारपन आयेगा और थोडा नींबू डालेगे तो neutral हो जायेगा। ऐसी चाय आपको कभी कोई नुकशान नहीं करेगी आप इसे पीये तो जीवनभर बिना किसी दुःख और तकलीफ आप पी सकते है।।

मित्रों, अगर आप कर पायें सम्भव हो तो हरे पत्तियों की चाय पीयें। ये चाय आती है बाजार में जिसे टी स्पून कहा जाता है, ये स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं होती है। आपको हरे पत्तेवाली चाय मिल रही है तो कम से कम इतना जरूर फायदा है की वो anti-oxidant property वाली है। क्यूंकि हरे पत्तों को सीधे निकालकर, सुखाकर आप बना रहे है। चूरेवाली चाय जो आप पी रहे है उससे ये थोडी बेहतर होती है।।

।। सदा सत्संग करें । सदाचारी और शाकाहारी बनें । सभी जीवों की रक्षा करें ।।

नारायण सभी का नित्य कल्याण करें । सभी सदा खुश एवं प्रशन्न रहें ।।

जयतु संस्कृतम् जयतु भारतम्।।

।। नमों नारायण ।।

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भागवत प्रवक्ता- स्वामी धनञ्जय जी महाराज "श्रीवैष्णव" परम्परा को परम्परागत और निःस्वार्थ भाव से निरन्तर विस्तारित करने में लगे हैं। श्रीवेंकटेश स्वामी मन्दिर, दादरा एवं नगर हवेली (यूनियन टेरेटरी) सिलवासा में स्थायी रूप से रहते हैं। वैष्णव धर्म के विस्तारार्थ "स्वामी धनञ्जय प्रपन्न रामानुज वैष्णव दास" के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत जी की कथा का श्रवण करने हेतु संपर्क कर सकते हैं।।

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